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6 Jun 2016 · 1 min read

हरदम खेल दिखाये

नए ज़िन्दगी देखो हमको हरदम खेल दिखाये
अगर हँसाती हमें कभी तो ये ही हमें रुलाये
एक मदारी है ईश्वर औ हम सब यहाँ जमूरे
डोर उसी के हाथों में वो जैसा हमें नचाये
डॉ अर्चना गुप्ता

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
224 Views
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