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2 Feb 2023 · 1 min read

हम भी अगर बच्चे होते

खिलौनों से भरे बस्ते होते
हम भी अगर बच्चे होते

शाम को ही सो जाते हम
सुबह को रात लगती कम
खेलते रहते शामों सहर
पाने का ना खोने का डर

मासूम और सच्चे होते
हम भी अगर बच्चे होते

चिंता ना घर गृहस्थी की
खेलकूद जीवन मस्ती की
जिम्मेदारी न लेना देना
मां कहती सोना मोना

ना फिक्र घर कच्चे होते
हम भी अगर बच्चे होते

न कसरत ना ही योग से
ना मतलब रोग निरोग से
खेले कंकड़-पत्थर,मिट्टी से
बीज, पत्ते,चिप्पी, गिट्टी से

मुंह हाथ में भरे गट्टे होते
हम भी अगर बच्चे होते

नूर फातिमा खातून” नूरी”
जिला- कुशीनगर
उत्तर प्रदेश
मौलिक स्वरचित

Language: Hindi
1 Like · 216 Views
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