Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Apr 2022 · 1 min read

*हमें मिले अनमोल पिता 【गीत】*

हमें मिले अनमोल पिता 【गीत】
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
धन्य-धन्य सौभाग्य हमारा ,हमें मिले अनमोल पिता
(1)
आदर्शों को सदा आपने मंत्रों जैसे गाया
अनुशासन-विश्वास मनुज की पूँजी है बतलाया
खुद के बल पर ही चलने की सीख सदा सिखलाई
बना आत्मनिर्भर जीवन यों सीख काम में आई
ऊपर से थे सख्त मगर भीतर मिश्री के घोल पिता
धन्य-धन्य सौभाग्य हमारा ,हमें मिले अनमोल पिता
(2)
जीवन एक कहानी अथवा उपन्यास बन जाता
जीवन के प्रत्येक पृष्ठ का श्रम से गहरा नाता
अपना गढ़ा हुआ था जीवन संतोषी थी काया
जो चाहा संपूर्ण मिला सम्मान-मान था पाया
शुद्ध भाव सरपंच तराजू वाली जैसे तोल पिता
धन्य-धन्य सौभाग्य हमारा ,हमें मिले अनमोल पिता
(3)
बोझ उठाया घर-भर का लेकिन फिर भी मुस्काते
थके हुए अक्सर सौ-सौ चिंताएँ लेकर आते
खुशी मनाने की परिपाटी घर में सदा निभाते
दूरदृष्टि से चिंताओं को चुटकी में सुलझाते
जो कह दिया सत्य ही निकला ,वेदों के ज्यों बोल पिता
धन्य-धन्य सौभाग्य हमारा ,हमें मिले अनमोल पिता
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

3 Likes · 2 Comments · 170 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
आजादी की कहानी
आजादी की कहानी
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
वर्तमान में जो जिये,
वर्तमान में जो जिये,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
स्वातंत्र्य का अमृत महोत्सव
स्वातंत्र्य का अमृत महोत्सव
surenderpal vaidya
कंचन कर दो काया मेरी , हे नटनागर हे गिरधारी
कंचन कर दो काया मेरी , हे नटनागर हे गिरधारी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
जो भी मिलता है दिलजार करता है
जो भी मिलता है दिलजार करता है
कवि दीपक बवेजा
हृदय मे भरा अंधेरा घनघोर है,
हृदय मे भरा अंधेरा घनघोर है,
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
बूढ़ी मां
बूढ़ी मां
Sûrëkhâ Rãthí
बहुत कुछ अधूरा रह जाता है ज़िन्दगी में
बहुत कुछ अधूरा रह जाता है ज़िन्दगी में
शिव प्रताप लोधी
*देश के  नेता खूठ  बोलते  फिर क्यों अपने लगते हैँ*
*देश के नेता खूठ बोलते फिर क्यों अपने लगते हैँ*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
हम रंगों से सजे है
हम रंगों से सजे है
'अशांत' शेखर
रूठ जा..... ये हक है तेरा
रूठ जा..... ये हक है तेरा
सिद्धार्थ गोरखपुरी
देखिए लोग धोखा गलत इंसान से खाते हैं
देखिए लोग धोखा गलत इंसान से खाते हैं
शेखर सिंह
एक बछड़े को देखकर
एक बछड़े को देखकर
Punam Pande
"दो धाराएँ"
Dr. Kishan tandon kranti
💐प्रेम कौतुक-171💐
💐प्रेम कौतुक-171💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
चमचम चमके चाँदनी, खिली सँवर कर रात।
चमचम चमके चाँदनी, खिली सँवर कर रात।
डॉ.सीमा अग्रवाल
नौकरी (२)
नौकरी (२)
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
अवसाद का इलाज़
अवसाद का इलाज़
DR ARUN KUMAR SHASTRI
इन आँखों को हो गई,
इन आँखों को हो गई,
sushil sarna
दोस्ती तेरी मेरी
दोस्ती तेरी मेरी
Surya Barman
ब्यूटी विद ब्रेन
ब्यूटी विद ब्रेन
Shekhar Chandra Mitra
(20) सजर #
(20) सजर #
Kishore Nigam
Why Not Heaven Have Visiting Hours?
Why Not Heaven Have Visiting Hours?
Manisha Manjari
समझौता
समझौता
Sangeeta Beniwal
दोहा
दोहा
दुष्यन्त 'बाबा'
रोजी रोटी के क्या दाने
रोजी रोटी के क्या दाने
AJAY AMITABH SUMAN
मुरझाए चेहरे फिर खिलेंगे, तू वक्त तो दे उसे
मुरझाए चेहरे फिर खिलेंगे, तू वक्त तो दे उसे
Chandra Kanta Shaw
ये जो नफरतों का बीज बो रहे हो
ये जो नफरतों का बीज बो रहे हो
Gouri tiwari
*वही निर्धन कहाता है, मनुज जो स्वास्थ्य खोता है (मुक्तक)*
*वही निर्धन कहाता है, मनुज जो स्वास्थ्य खोता है (मुक्तक)*
Ravi Prakash
2774. *पूर्णिका*
2774. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
Loading...