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4 Feb 2023 · 1 min read

हज़ारों के दिलबर ग़ज़ल विनीत सिंह शायर

ग़ज़ल ये आख़िरी हम पढ़ रहे हैं
हम उसको याद कर के मर रहे हैं

हमारे बाद क्या बोलेगी दुनियाँ
ये किस माहौल से हम डर रहे हैं

ग़ज़ल ये लिख रहे हैं आख़िरी अब
तुम्हारे नाम यह भी कर रहे हैं

लिखा था ख़त तुझे तन्हाई में जो
कहीं पे दफ़्न होकर सड़ रहे हैं

हमारा दिल हुआ ग़म से भी खाली
तुम्ही को याद कर के भर रहे हैं

इधर तन्हाई में मर गएँ उधर वो
हज़ारों के बने दिलबर रहे हैं

~विनीत सिंह
Vinit Singh Shayar

Language: Hindi
84 Views
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