Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Sep 2022 · 1 min read

स्पंदित अरदास!

ऑंचल के कोने बाॅंधा जो,
माॅ थोड़ा बचपन रख देना।
मन दीपक की लौ काॅंपे तो ,
प्रेम हथेली से ढक देना।।

बहुत कठिन है वचन निभाना,
दुर्गम पथ पर चलना भी।
माॅ तुमसे सीखा है मैंने,
नहीं किसी को छलना भी ।
वेद-ऋचा से कण-कण भर लूॅं
माथ-हाथ चंदन रख देना।

कभी भॅंवर सा मिलता जीवन,
कभी नेह-सरि जैसा भी।
आयु बदलती जाती है पर,
सुधियों का घर वैसा ही ।
पीड़ाओं से अर्चन कर लूॅं,
अधर ईश-वंदन रख देना!

रश्मि लहर

Language: Hindi
Tag: गीत
4 Likes · 8 Comments · 210 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
हस्ती
हस्ती
Shyam Sundar Subramanian
* हिन्दी को ही *
* हिन्दी को ही *
surenderpal vaidya
मंगल मूरत
मंगल मूरत
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
"इस्तिफ़सार" ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
विषय -परिवार
विषय -परिवार
Nanki Patre
*कभी जिंदगी अच्छी लगती, कभी मरण वरदान है (गीत)*
*कभी जिंदगी अच्छी लगती, कभी मरण वरदान है (गीत)*
Ravi Prakash
.............सही .......
.............सही .......
Naushaba Suriya
दोहे- उड़ान
दोहे- उड़ान
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
ये सुबह खुशियों की पलक झपकते खो जाती हैं,
ये सुबह खुशियों की पलक झपकते खो जाती हैं,
Manisha Manjari
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
जिंदगी
जिंदगी
Dr.Priya Soni Khare
कतरनों सा बिखरा हुआ, तन यहां
कतरनों सा बिखरा हुआ, तन यहां
Pramila sultan
हनुमंत लाल बैठे चरणों में देखें प्रभु की प्रभुताई।
हनुमंत लाल बैठे चरणों में देखें प्रभु की प्रभुताई।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
कोहरा और कोहरा
कोहरा और कोहरा
Ghanshyam Poddar
कभी कभी आईना भी,
कभी कभी आईना भी,
शेखर सिंह
देव उठनी
देव उठनी
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
प्यारा भारत देश है
प्यारा भारत देश है
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
बचपन
बचपन
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
आज के समय में शादियों की बदलती स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।
आज के समय में शादियों की बदलती स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।
पूर्वार्थ
3 *शख्सियत*
3 *शख्सियत*
Dr Shweta sood
आपकी अच्छाईया बेशक अदृष्य हो सकती है
आपकी अच्छाईया बेशक अदृष्य हो सकती है
Rituraj shivem verma
प्रीति क्या है मुझे तुम बताओ जरा
प्रीति क्या है मुझे तुम बताओ जरा
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
उदघोष
उदघोष
DR ARUN KUMAR SHASTRI
बोल
बोल
Dr. Pradeep Kumar Sharma
रावण की गर्जना व संदेश
रावण की गर्जना व संदेश
Ram Krishan Rastogi
मैं कुछ इस तरह
मैं कुछ इस तरह
Dr Manju Saini
अब कलम से न लिखा जाएगा इस दौर का हाल
अब कलम से न लिखा जाएगा इस दौर का हाल
Atul Mishra
वाह नेता जी!
वाह नेता जी!
Sanjay ' शून्य'
आंखों में नींद आती नही मुझको आजकल
आंखों में नींद आती नही मुझको आजकल
कृष्णकांत गुर्जर
पुलिस बनाम लोकतंत्र (व्यंग्य) +रमेशराज
पुलिस बनाम लोकतंत्र (व्यंग्य) +रमेशराज
कवि रमेशराज
Loading...