Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 May 2017 · 2 min read

स्त्री और नदी का स्वच्छन्द विचरण घातक और विनाशकारी

स्त्री और नदी दोनों ही समाज में वन्दनीय है तब तक जब तक कि वो अपनी सीमा रेखाओं का उल्लंघन नही करती | स्त्री का व्यक्तित्व स्वच्छ निर्मल नदी की तरह है जिस प्रकार नदी का प्रवाह पवित्र और आनन्दकारक होता है उसी प्रकार सीमा रेखा में बंधी नारी आदरणीय और वन्दनीय शक्ति के रूप में परिवार और समाज में रहती है| लेकिन इतिहास साक्षी है की जब –जब भी नदियों ने अपनी सीमा रेखाओं का उल्लंघन किया है समाज बढ़े –बढे संकटों से जूझता नजर आया है| तथाकथित कुछ महिलाओं ने आधुनिकता और स्वतंत्रता के नाम पर जब से स्वच्छंद विचरण करते हुए सीमाओं का उल्लंघन करना शुरू किया है तब से महिलाओं की स्थिति दयनीय और हेय होती चली गयी है | इसका खामियाज़ा उन महिलाओं को भी उठाना पढ़ा है जो समाज के अनुरूप मर्यादित जीवन जीती है इसका बहुत बढ़ा उदाहरण हमारा सिनेमा है जिसने समाज को दूषित कलुषित मनोरंजन देकर युवतियों को भटकाव की ओर धकेला है | समाज में आये दिन घटने वाली शर्मनाक घटनाएं जिनसे समाचार पत्र भरे पढ़े है सीमाओं के उल्लंघन के साक्षी है रामायण कि एक घटना याद आती है, की जब लक्ष्मण द्वारा लक्ष्मण रेखा एक बार खींच दी गयी तो वह केवल एक रेखा मात्र नही बल्कि समाजिक मर्याद का प्रतिनिधित्व करने वाली मर्यादा की रेखा बन गयी थी| लक्ष्मण ने बाण से रेखा खीचकर उसे विश्वास रुपी मन्त्रों से अभिमंत्रित किया और राम की सहायता के लिए जंगल की ओर दौढ़ पढ़े सीता को हिदायत दी गयी कि वह रेखा पार न करे लेकिन विधि का विधान कुछ अलग ही था| रावण जैसा सिद्ध भी उस रेखा के भीतर नहीं जा सका था | लेकिन सीता ने जैसे ही लक्ष्मण रेखा पार की रघुकुल संकट में पड़ गया फिर जो हुआ वो सभी को विदित है| नारी जब तक सीमाओं में रहे कुल की रक्षा भगवान् करते है एक बार मर्यादा की सीमा लांघी तो स्त्री पर पुरुष के विश्वास और स्त्री की अस्मिता और गरिमा का हरण तय है जब सीता जैसी सती को मर्यादा उल्लंघन का कठोर कष्ट उठाना पड़ा यहाँ तक की दो बार वनवास भोगना पढ़ा | न्यायालयों में लंबित मुकदमों की संख्या बताती है कि सीमायें रोज लांघी जा रही है क्योंकि कलयुग में लक्ष्मण रेखा धूमिल हो चुकी है|

Language: Hindi
Tag: लेख
1 Like · 799 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
भय
भय
Shyam Sundar Subramanian
तन्हा ही खूबसूरत हूं मैं।
तन्हा ही खूबसूरत हूं मैं।
शक्ति राव मणि
पर्वत को आसमान छूने के लिए
पर्वत को आसमान छूने के लिए
उमेश बैरवा
World Tobacco Prohibition Day
World Tobacco Prohibition Day
Tushar Jagawat
"बढ़ते चलो"
Dr. Kishan tandon kranti
दिल में गहराइयां
दिल में गहराइयां
Dr fauzia Naseem shad
संघर्ष ,संघर्ष, संघर्ष करना!
संघर्ष ,संघर्ष, संघर्ष करना!
Buddha Prakash
दोस्ती एक पवित्र बंधन
दोस्ती एक पवित्र बंधन
AMRESH KUMAR VERMA
एक मन
एक मन
Dr.Priya Soni Khare
दशहरा
दशहरा
मनमोहन लाल गुप्ता 'अंजुम'
कुछ लिखा हू तुम्हारी यादो में
कुछ लिखा हू तुम्हारी यादो में
देवराज यादव
रोज़ आकर वो मेरे ख़्वाबों में
रोज़ आकर वो मेरे ख़्वाबों में
Neelam Sharma
If you have  praising people around you it means you are lac
If you have praising people around you it means you are lac
Ankita Patel
जीत रही है जंग शांति की हार हो रही।
जीत रही है जंग शांति की हार हो रही।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
#झांसों_से_बचें
#झांसों_से_बचें
*प्रणय प्रभात*
कुंडलिया
कुंडलिया
sushil sarna
माॅ॑ बहुत प्यारी बहुत मासूम होती है
माॅ॑ बहुत प्यारी बहुत मासूम होती है
VINOD CHAUHAN
23/67.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/67.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
..कदम आगे बढ़ाने की कोशिश करता हू...*
..कदम आगे बढ़ाने की कोशिश करता हू...*
Naushaba Suriya
गर्व की बात
गर्व की बात
इंजी. संजय श्रीवास्तव
बिल्कुल नहीं हूँ मैं
बिल्कुल नहीं हूँ मैं
Aadarsh Dubey
विषय – मौन
विषय – मौन
DR ARUN KUMAR SHASTRI
फाउंटेन पेन (बाल कविता )
फाउंटेन पेन (बाल कविता )
Ravi Prakash
नादानी
नादानी
Shaily
करे मतदान
करे मतदान
Pratibha Pandey
कुछ लोग बड़े बदतमीज होते हैं,,,
कुछ लोग बड़े बदतमीज होते हैं,,,
विमला महरिया मौज
मैं लिखता हूं..✍️
मैं लिखता हूं..✍️
Shubham Pandey (S P)
हंसी आयी है लबों पर।
हंसी आयी है लबों पर।
Taj Mohammad
ग़ज़ल- मशालें हाथ में लेकर ॲंधेरा ढूॅंढने निकले...
ग़ज़ल- मशालें हाथ में लेकर ॲंधेरा ढूॅंढने निकले...
अरविन्द राजपूत 'कल्प'
तुम्हारी दुआ।
तुम्हारी दुआ।
सत्य कुमार प्रेमी
Loading...