Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings

सोच समझ कर बोला कर राज़ न दिल के खोला कर

सोच समझ कर बोला कर
राज़ न दिल के खोला कर

इतनी सख़्ती ठीक नहीं
ख़ुद को थोड़ा पोला कर

सब तो एक न जैसे हैं
बोल न सबको भोला कर

दिल का हल्का भारीपन
एक नज़र में तोला कर

अंगारों की फसल उगा
बुझती राख टटोला कर

कुछ तो आग़ दिखाई दे
हर चिंगारी शोला कर

हर्फ़ हर्फ़ बारूद बना
गीत ग़ज़ल हथगोला कर

सीख कुचलना विषधर फन
मारा रोज़ सँपोला कर

राकेश दुबे “गुलशन”
10/07/2016
बरेली

3 Comments · 245 Views
You may also like:
✍️अकेले रह गये ✍️
Vaishnavi Gupta
पिता की नसीहत
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
आंसूओं की नमी
Dr fauzia Naseem shad
कौन होता है कवि
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
चराग़ों को जलाने से
Shivkumar Bilagrami
"फिर से चिपको"
पंकज कुमार कर्ण
यादें
kausikigupta315
✍️आज के युवा ✍️
Vaishnavi Gupta
बेटियों तुम्हें करना होगा प्रश्न
rkchaudhary2012
प्रकृति के चंचल नयन
मनोज कर्ण
कोई खामोशियां नहीं सुनता
Dr fauzia Naseem shad
आत्मनिर्भर
मनोज कर्ण
✍️काश की ऐसा हो पाता ✍️
Vaishnavi Gupta
रावण का प्रश्न
Anamika Singh
जुद़ा किनारे हो गये
शेख़ जाफ़र खान
जीवन एक कारखाना है /
ईश्वर दयाल गोस्वामी
जीवन-रथ के सारथि_पिता
मनोज कर्ण
गुरुजी!
Vishnu Prasad 'panchotiya'
सृजन कर्ता है पिता।
Taj Mohammad
अमर शहीद चंद्रशेखर "आज़ाद" (कुण्डलिया)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
शरद ऋतु ( प्रकृति चित्रण)
Vishnu Prasad 'panchotiya'
प्यार
Anamika Singh
इश्क
Anamika Singh
✍️बारिश का मज़ा ✍️
Vaishnavi Gupta
बेटियों की जिंदगी
AMRESH KUMAR VERMA
✍️बचपन का ज़माना ✍️
Vaishnavi Gupta
रिश्तों में बढ रही है दुरियाँ
Anamika Singh
【6】** माँ **
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
"समय का पहिया"
Ajit Kumar "Karn"
यह सिर्फ़ वर्दी नहीं, मेरी वो दौलत है जो मैंने...
Lohit Tamta
Loading...