Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Jul 2023 · 1 min read

*सेब (बाल कविता)*

सेब (बाल कविता)

नहीं सेब केवल फल मानो
इसको एक चिकित्सक जानो
सब रोगों को दूर भगाता
सेब रोज जो मानव खाता
मौसम में ठेले भर आते
सभी लोग जी भर कर खाते

रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

470 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
मेरे जज़्बात को चिराग कहने लगे
मेरे जज़्बात को चिराग कहने लगे
सिद्धार्थ गोरखपुरी
ग़ज़ल (थाम लोगे तुम अग़र...)
ग़ज़ल (थाम लोगे तुम अग़र...)
डॉक्टर रागिनी
जिन्हें बुज़ुर्गों की बात
जिन्हें बुज़ुर्गों की बात
*प्रणय प्रभात*
गाली भरी जिंदगी
गाली भरी जिंदगी
Dr MusafiR BaithA
Thought
Thought
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
आसां  है  चाहना  पाना मुमकिन नहीं !
आसां है चाहना पाना मुमकिन नहीं !
Sushmita Singh
3117.*पूर्णिका*
3117.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
औरतें ऐसी ही होती हैं
औरतें ऐसी ही होती हैं
Mamta Singh Devaa
ग़ज़ल सगीर
ग़ज़ल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
दादी दादा का प्रेम किसी भी बच्चे को जड़ से जोड़े  रखता है या
दादी दादा का प्रेम किसी भी बच्चे को जड़ से जोड़े रखता है या
Utkarsh Dubey “Kokil”
कलियुग के प्रथम चरण का आरंभ देखिये
कलियुग के प्रथम चरण का आरंभ देखिये
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
अयाग हूँ मैं
अयाग हूँ मैं
Mamta Rani
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
गरीबी तमाशा
गरीबी तमाशा
Dr fauzia Naseem shad
इंतज़ार एक दस्तक की, उस दरवाजे को थी रहती, चौखट पर जिसकी धूल, बरसों की थी जमी हुई।
इंतज़ार एक दस्तक की, उस दरवाजे को थी रहती, चौखट पर जिसकी धूल, बरसों की थी जमी हुई।
Manisha Manjari
मुझे नहीं नभ छूने का अभिलाष।
मुझे नहीं नभ छूने का अभिलाष।
Anil Mishra Prahari
मूरत
मूरत
कविता झा ‘गीत’
*Relish the Years*
*Relish the Years*
Poonam Matia
Friendship Day
Friendship Day
Tushar Jagawat
सत्य की खोज
सत्य की खोज
Shyam Sundar Subramanian
कसौटी
कसौटी
Sanjay ' शून्य'
सामाजिक कविता: बर्फ पिघलती है तो पिघल जाने दो,
सामाजिक कविता: बर्फ पिघलती है तो पिघल जाने दो,
Rajesh Kumar Arjun
सिकन्दर बन कर क्या करना
सिकन्दर बन कर क्या करना
Satish Srijan
हवा चली है ज़ोर-ज़ोर से
हवा चली है ज़ोर-ज़ोर से
Vedha Singh
*** तूने क्या-क्या चुराया ***
*** तूने क्या-क्या चुराया ***
Chunnu Lal Gupta
ओ मेरी सोलमेट जन्मों से - संदीप ठाकुर
ओ मेरी सोलमेट जन्मों से - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
नच ले,नच ले,नच ले, आजा तू भी नच ले
नच ले,नच ले,नच ले, आजा तू भी नच ले
gurudeenverma198
चंद्रयान 3
चंद्रयान 3
Dr.Priya Soni Khare
दुआ को असर चाहिए।
दुआ को असर चाहिए।
Taj Mohammad
9) “जीवन एक सफ़र”
9) “जीवन एक सफ़र”
Sapna Arora
Loading...