Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Oct 2023 · 1 min read

सुविचार

सुविचार
——()()()()()()()()()—-
विचार चाहे कितने भी
उत्तम क्यों ना हो,
वह सार्थक तभी माने जाते हैं,
जब उनकी झलक
व्यवहार में दिखती हैं
इन बातों को अवश्य
व्यवहार में लायें_

289 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
ख़ुद को ख़ोकर
ख़ुद को ख़ोकर
Dr fauzia Naseem shad
बाहर से लगा रखे ,दिलो पर हमने ताले है।
बाहर से लगा रखे ,दिलो पर हमने ताले है।
Surinder blackpen
भय के कारण सच बोलने से परहेज न करें,क्योंकि अन्त में जीत सच
भय के कारण सच बोलने से परहेज न करें,क्योंकि अन्त में जीत सच
Babli Jha
चूहा और बिल्ली
चूहा और बिल्ली
Kanchan Khanna
तपिश धूप की तो महज पल भर की मुश्किल है साहब
तपिश धूप की तो महज पल भर की मुश्किल है साहब
Yogini kajol Pathak
🌿⚘️प्राचीन  मंदिर (मड़) ककरुआ⚘️🌿
🌿⚘️प्राचीन मंदिर (मड़) ककरुआ⚘️🌿
Ms.Ankit Halke jha
राखी प्रेम का बंधन
राखी प्रेम का बंधन
रवि शंकर साह
■ इस बार 59 दिन का सावन
■ इस बार 59 दिन का सावन
*Author प्रणय प्रभात*
भारत भूमि में पग पग घूमे ।
भारत भूमि में पग पग घूमे ।
Buddha Prakash
यह कब जान पाता है एक फूल,
यह कब जान पाता है एक फूल,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
जीवन चक्र
जीवन चक्र
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
जाने वाले साल को सलाम ,
जाने वाले साल को सलाम ,
Dr. Man Mohan Krishna
"चार पैरों वाला मेरा यार"
Lohit Tamta
देखिए मायका चाहे अमीर हो या गरीब
देखिए मायका चाहे अमीर हो या गरीब
शेखर सिंह
पुस्तकें
पुस्तकें
डॉ. शिव लहरी
💐प्रेम कौतुक-360💐
💐प्रेम कौतुक-360💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
बीमार समाज के मसीहा: डॉ अंबेडकर
बीमार समाज के मसीहा: डॉ अंबेडकर
Shekhar Chandra Mitra
महबूबा
महबूबा
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
देश के दुश्मन कहीं भी, साफ़ खुलते ही नहीं हैं
देश के दुश्मन कहीं भी, साफ़ खुलते ही नहीं हैं
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
जात आदमी के
जात आदमी के
AJAY AMITABH SUMAN
बदन खुशबुओं से महकाना छोड़ दे
बदन खुशबुओं से महकाना छोड़ दे
कवि दीपक बवेजा
"जलेबी"
Dr. Kishan tandon kranti
कैसे देख पाओगे
कैसे देख पाओगे
ओंकार मिश्र
24/251. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
24/251. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
पहले प्रेम में चिट्ठी पत्री होती थी
पहले प्रेम में चिट्ठी पत्री होती थी
Shweta Soni
//सुविचार//
//सुविचार//
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
मुझे गर्व है अलीगढ़ पर #रमेशराज
मुझे गर्व है अलीगढ़ पर #रमेशराज
कवि रमेशराज
आज
आज
Shyam Sundar Subramanian
*रहेगा सर्वदा जीवन, सभी को एक यह भ्रम है (मुक्तक)*
*रहेगा सर्वदा जीवन, सभी को एक यह भ्रम है (मुक्तक)*
Ravi Prakash
"नए सवेरे की खुशी" (The Joy of a New Morning)
Sidhartha Mishra
Loading...