Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 May 2024 · 1 min read

सुन लिया करो दिल की आवाज को,

सुन लिया करो दिल की आवाज को,
जो सबको नही सिर्फ तुम्हे सुनाई देती है,
मंजील तो अभी बहोत दूर है ,
रास्तो सें पहले पहचान करवा देती है …

27 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
दिल में है जो बात
दिल में है जो बात
Surinder blackpen
जाने दिया
जाने दिया
Kunal Prashant
एक सशक्त लघुकथाकार : लोककवि रामचरन गुप्त
एक सशक्त लघुकथाकार : लोककवि रामचरन गुप्त
कवि रमेशराज
एक बार फिर ।
एक बार फिर ।
Dhriti Mishra
जिन्दा हो तो,
जिन्दा हो तो,
नेताम आर सी
आता एक बार फिर से तो
आता एक बार फिर से तो
Dr Manju Saini
कबीरा यह मूर्दों का गांव
कबीरा यह मूर्दों का गांव
Shekhar Chandra Mitra
जिंदगी और जीवन में अंतर हैं
जिंदगी और जीवन में अंतर हैं
Neeraj Agarwal
"जीवन की अंतिम यात्रा"
Pushpraj Anant
*किसी कार्य में हाथ लगाना (हास्य व्यंग्य)*
*किसी कार्य में हाथ लगाना (हास्य व्यंग्य)*
Ravi Prakash
हमें पता है कि तुम बुलाओगे नहीं
हमें पता है कि तुम बुलाओगे नहीं
VINOD CHAUHAN
जब ज्ञान स्वयं संपूर्णता से परिपूर्ण हो गया तो बुद्ध बन गये।
जब ज्ञान स्वयं संपूर्णता से परिपूर्ण हो गया तो बुद्ध बन गये।
manjula chauhan
मुझे दर्द सहने की आदत हुई है।
मुझे दर्द सहने की आदत हुई है।
Taj Mohammad
हे परम पिता परमेश्वर,जग को बनाने वाले
हे परम पिता परमेश्वर,जग को बनाने वाले
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
you don’t need a certain number of friends, you just need a
you don’t need a certain number of friends, you just need a
पूर्वार्थ
दो अक्टूबर
दो अक्टूबर
नूरफातिमा खातून नूरी
चिंतन करत मन भाग्य का
चिंतन करत मन भाग्य का
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
बसंत
बसंत
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
बचपन
बचपन
Vedha Singh
ईश्वर का अस्तित्व एवं आस्था
ईश्वर का अस्तित्व एवं आस्था
Shyam Sundar Subramanian
मुझमें भी कुछ अच्छा है
मुझमें भी कुछ अच्छा है
Shweta Soni
चाँद
चाँद
Davina Amar Thakral
मौत के बाज़ार में मारा गया मुझे।
मौत के बाज़ार में मारा गया मुझे।
Phool gufran
कैसे कहूँ ‘आनन्द‘ बनने में ज़माने लगते हैं
कैसे कहूँ ‘आनन्द‘ बनने में ज़माने लगते हैं
Anand Kumar
"यह कैसा नशा?"
Dr. Kishan tandon kranti
*Broken Chords*
*Broken Chords*
Poonam Matia
मुझको बे'चैनियाँ जगा बैठी
मुझको बे'चैनियाँ जगा बैठी
Dr fauzia Naseem shad
2570.पूर्णिका
2570.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
आरक्षण बनाम आरक्षण / MUSAFIR BAITHA
आरक्षण बनाम आरक्षण / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
नजर लगी हा चाँद को, फीकी पड़ी उजास।
नजर लगी हा चाँद को, फीकी पड़ी उजास।
डॉ.सीमा अग्रवाल
Loading...