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17 May 2024 · 1 min read

सिय का जन्म उदार / माता सीता को समर्पित नवगीत

निर्मलता का
वरद उद्धरण
सिय का जन्म उदार ।

ज्ञान,विराग,
प्रेम के अंचल,
खेला बचपन
प्रमुदित चंचल ।

मात सुनयना,
पिता जनक के
आँगन का संसार ।

पति चरणों में
अनुरक्ता की
कंटक भरी
युवावस्था थी ।

राजमहल से
वन-वन बिखरा
था,करुणामय प्यार ।

नारि-अस्मिता
के गौरव पर,
पति के मर्यादित
अनुभव पर ।

उठा लिया
परित्यक्ता बनकर
अग्नि-परीक्षा-भार ।

पुरुष-प्रधान
देश में नारी,
शोषित,पतिता
औ’ बेचारी ।

उक्त लांछनों
से सिय का भी
जीवन रहा शिकार ।

निर्मलता का
वरद उद्धरण
सिय का जन्म उदार ।
००
— ईश्वर दयाल गोस्वामी ।

Language: Hindi
Tag: गीत
3 Likes · 2 Comments · 129 Views
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