Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 Jul 2016 · 1 min read

सहिष्णु

एक मुक्तक।

कल तक तो इन सबको देखो होती चिंता भारी थी।
बात बात पर जीभ सभी की पैनी छुरी कटारी थी।
आज सहिष्णु चुप बैठे हैं घाटी के हालातों पर।
शायद उस आतंकी से इन सबकी रिश्तेदारी थी।

प्रदीप कुमार

Language: Hindi
Tag: गीत
1 Like · 1 Comment · 203 Views
You may also like:
परमात्मनः प्राप्तया: स्थानं हृदयम्
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
बिखरा था बस..
Vijay kumar Pandey
मंजिल दूर है
Varun Singh Gautam
पहले तेरे हाथों पर
D.k Math { ਧਨੇਸ਼ }
वो पहलू में आयें तभी बात होगी।
सत्य कुमार प्रेमी
■ लघुकथा / बस दो शब्द
*Author प्रणय प्रभात*
बचे हैं जो अरमां तुम्हारे दिल में
Ram Krishan Rastogi
" लज्जित आंखें "
Dr Meenu Poonia
अश्रुपात्र A glass of tears भाग 10
Dr. Meenakshi Sharma
कलयुग में भी गोपियाँ कैसी फरियाद /लवकुश यादव "अज़ल"
लवकुश यादव "अज़ल"
रिश्ता
सुशील कुमार सिंह "प्रभात"
राम बनो!
Suraj kushwaha
जिंदगी भर का चैन ले गए।
Taj Mohammad
“ हम महान बनने की चाहत में लोगों से दूर...
DrLakshman Jha Parimal
भूख
मनोज कर्ण
हरा जगत में फैलता, सिमटे केसर रंग
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
ईनाम
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
कभी हक़ किसी पर
Dr fauzia Naseem shad
पहला प्यार
Pratibha Kumari
Gazal
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
दीपावली :दोहे
Sushila Joshi
मौसम तो बस बहाना हुआ है
Kaur Surinder
कई सूर्य अस्त हो जाते हैं
कवि दीपक बवेजा
दुर्योधन कब मिट पाया :भाग:40
AJAY AMITABH SUMAN
तानाशाहों की मौत
Shekhar Chandra Mitra
हे! राम
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
✍️जश्न-ए-चराग़ाँ✍️
'अशांत' शेखर
*जरा उठे जो अहंकार ने झटपट आ जकड़ा है (हिंदी...
Ravi Prakash
✍️महज़ बातें ✍️
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
इश्क
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
Loading...