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14 Jan 2024 · 1 min read

सलाह …. लघुकथा

सलाह …(लघुकथा )

“बाबू जी, बाबू जी । बच्चा भूखा है । कुछ दे दो ।”
एक भिखारिन अपने 5-6 माह के बच्चे को अस्त-व्यस्त से कपड़ों में दूध पिलाते हुए गिड़गिराई ।

” क्या है , काम क्यों नहीं करती । भीख मांगते हुए शर्म नहीं आती क्या । जब बच्चे पाले नहीं जाते तो पैदा क्यों करते हो ।” राहुल भिखारिन को डाँटते हुए बोला ।

“आती है साहब बहुत आती है भीख मांगने में नहीं बल्कि काम करने में आती है ।” भिखारिन ने कहा ।

“क्यों ?” राहुल ने पूछा ।

“साहब ,आप जैसे ही किसी भद्र पुरुष के कहने पर मैंने उनके घर पर काम करना स्वीकार किया था परन्तु … ।” भिखारिन कहते-कहते रुक गई ।

“परन्तु क्या ?” राहुल ने पूछा ।

“साहब, उस भद्र पुरुष ने मेरी मजबूरी को इस कलंक से अलंकृत कर दिया ।” भिखारिन बच्चे के सिर पर हाथ फेरते हुए बोली ।

राहुल चुप हो गया । उसे ऐसा लगा मानो किसी ने उस की भद्र सलाह को गाली दी हो । उसने उसे कुछ पैसे दिए और अपनी सलाह को अपने थैले में डालकर निगाह नीची कर अपने गन्तव्य की ओर कुछ सोचते हुए चल दिया ।

सुशील सरना / 14-1-24

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