Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Jun 2023 · 1 min read

सर के बल चलकर आएँगी, खुशियाँ अपने आप।

सर के बल चलकर आएँगी, खुशियाँ अपने आप।
सहला तेरे तप्त बदन को, हर लेंगी संताप।
कर्म किए जा बस तू अपना, बिन सोचे परिणाम।
ऐसी-तैसी कर दुनिया की, भली करेंगे राम।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

2 Likes · 267 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from डॉ.सीमा अग्रवाल
View all
You may also like:
खुश रहने की कोशिश में
खुश रहने की कोशिश में
Surinder blackpen
मकरंद
मकरंद
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
नज्म- नजर मिला
नज्म- नजर मिला
Awadhesh Singh
"बँटवारा"
Dr. Kishan tandon kranti
जान लो पहचान लो
जान लो पहचान लो
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
तितली के तेरे पंख
तितली के तेरे पंख
मनमोहन लाल गुप्ता 'अंजुम'
राहुल की अंतरात्मा
राहुल की अंतरात्मा
Ghanshyam Poddar
मैं सुर हूॅ॑ किसी गीत का पर साज तुम्ही हो
मैं सुर हूॅ॑ किसी गीत का पर साज तुम्ही हो
VINOD CHAUHAN
23/56.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/56.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
रमेशराज की एक हज़ल
रमेशराज की एक हज़ल
कवि रमेशराज
1) आखिर क्यों ?
1) आखिर क्यों ?
पूनम झा 'प्रथमा'
शिछा-दोष
शिछा-दोष
Bodhisatva kastooriya
फ़ितरत को ज़माने की, ये क्या हो गया है
फ़ितरत को ज़माने की, ये क्या हो गया है
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
12, कैसे कैसे इन्सान
12, कैसे कैसे इन्सान
Dr .Shweta sood 'Madhu'
*मारा हमने मूक कब, पशु जो होता मौन (कुंडलिया)*
*मारा हमने मूक कब, पशु जो होता मौन (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
अस्तित्व की तलाश में
अस्तित्व की तलाश में
पूर्वार्थ
बहने दो निःशब्दिता की नदी में, समंदर शोर का मुझे भाता नहीं है
बहने दो निःशब्दिता की नदी में, समंदर शोर का मुझे भाता नहीं है
Manisha Manjari
गुरु महिमा
गुरु महिमा
विजय कुमार अग्रवाल
भारत चाँद पर छाया हैं…
भारत चाँद पर छाया हैं…
शांतिलाल सोनी
* निशाने आपके *
* निशाने आपके *
surenderpal vaidya
🥀 *अज्ञानी की कलम* 🥀
🥀 *अज्ञानी की कलम* 🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
चित्र कितना भी ख़ूबसूरत क्यों ना हो खुशबू तो किरदार में है।।
चित्र कितना भी ख़ूबसूरत क्यों ना हो खुशबू तो किरदार में है।।
Lokesh Sharma
तेरी परवाह करते हुए ,
तेरी परवाह करते हुए ,
Buddha Prakash
कांच के जैसे टूट जाते हैं रिश्ते,
कांच के जैसे टूट जाते हैं रिश्ते,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
वो ज़ख्म जो दिखाई नहीं देते
वो ज़ख्म जो दिखाई नहीं देते
shabina. Naaz
कर्त्तव्य
कर्त्तव्य
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
गंगा- सेवा के दस दिन (छठा दिन)
गंगा- सेवा के दस दिन (छठा दिन)
Kaushal Kishor Bhatt
पिता
पिता
Shashi Mahajan
जीवन में ईनाम नहीं स्थान बड़ा है नहीं तो वैसे नोबेल , रैमेन
जीवन में ईनाम नहीं स्थान बड़ा है नहीं तो वैसे नोबेल , रैमेन
Rj Anand Prajapati
■ नंगे नवाब, किले में घर।।😊
■ नंगे नवाब, किले में घर।।😊
*प्रणय प्रभात*
Loading...