Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 Nov 2023 · 1 min read

सरस्वती वंदना-2

गीतिका
वीणा धारिणि मातु शारदा , बैठ हंस पर आना।
नव लेखन में हूँ प्रयास रत,मुझको जरा सिखाना।।

यति गति ताल छंद से मेरा,परिचय मातु कराओ,
लिखूँ गीतिका माता मैं तुम,त्रुटियाँ मुझे बताना।

नव पीढी तो भ्रमित तो रही,सत्पथ उसे दिखाओ,
क्रूर पातकी पंजों से माँ, हरपल उसे बचाना।

सबको चिंता केवल अपनी, स्वारथ में सब डूबे,
परमारथ ही जीवन है ये,सबको है समझाना।

मेरी जीवन साध यही है, निरत रहूँ लेखन में,
इसीलिये मैं चाह रहा माँ,चरणों निकट ठिकाना।।

शरण आपकी आया माता,मैं जड़मति अज्ञानी,
करो कृपा हे मातु सरस्वति,सीखूँ छंद बनाना।।
डाॅ बिपिन पाण्डेय

Language: Hindi
152 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*खारे पानी से भरा, सागर मिला विशाल (कुंडलिया)*
*खारे पानी से भरा, सागर मिला विशाल (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
ना जाने क्यों...?
ना जाने क्यों...?
भवेश
■ क़ायदे की बात...
■ क़ायदे की बात...
*प्रणय प्रभात*
Ghazal
Ghazal
shahab uddin shah kannauji
दिलबर दिलबर
दिलबर दिलबर
DR ARUN KUMAR SHASTRI
संसार में
संसार में
Brijpal Singh
एकतरफ़ा इश्क
एकतरफ़ा इश्क
Dipak Kumar "Girja"
क्या होगा कोई ऐसा जहां, माया ने रचा ना हो खेल जहां,
क्या होगा कोई ऐसा जहां, माया ने रचा ना हो खेल जहां,
Manisha Manjari
अपनी-अपनी दिवाली
अपनी-अपनी दिवाली
Dr. Pradeep Kumar Sharma
देखो भालू आया
देखो भालू आया
अनिल "आदर्श"
फ़र्क़ यह नहीं पड़ता
फ़र्क़ यह नहीं पड़ता
Anand Kumar
शायरी 1
शायरी 1
SURYA PRAKASH SHARMA
खुद की एक पहचान बनाओ
खुद की एक पहचान बनाओ
Vandna Thakur
जो रोज समय पर उगता है
जो रोज समय पर उगता है
Shweta Soni
" सर्कस सदाबहार "
Dr Meenu Poonia
1-अश्म पर यह तेरा नाम मैंने लिखा2- अश्म पर मेरा यह नाम तुमने लिखा (दो गीत) राधिका उवाच एवं कृष्ण उवाच
1-अश्म पर यह तेरा नाम मैंने लिखा2- अश्म पर मेरा यह नाम तुमने लिखा (दो गीत) राधिका उवाच एवं कृष्ण उवाच
Pt. Brajesh Kumar Nayak
शब्द
शब्द
Sûrëkhâ
बेऔलाद ही ठीक है यारों, हॉं ऐसी औलाद से
बेऔलाद ही ठीक है यारों, हॉं ऐसी औलाद से
gurudeenverma198
देश भक्त का अंतिम दिन
देश भक्त का अंतिम दिन
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
रिश्तों के
रिश्तों के
Dr fauzia Naseem shad
*जीवन में हँसते-हँसते चले गए*
*जीवन में हँसते-हँसते चले गए*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
**मातृभूमि**
**मातृभूमि**
लक्ष्मण 'बिजनौरी'
शाख़ ए गुल छेड़ कर तुम, चल दिए हो फिर कहां  ,
शाख़ ए गुल छेड़ कर तुम, चल दिए हो फिर कहां ,
Neelofar Khan
🌹ढ़ूढ़ती हूँ अक्सर🌹
🌹ढ़ूढ़ती हूँ अक्सर🌹
Dr Shweta sood
मां की याद
मां की याद
Neeraj Agarwal
घाव करे गंभीर
घाव करे गंभीर
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
नंबर पुराना चल रहा है नई ग़ज़ल Vinit Singh Shayar
नंबर पुराना चल रहा है नई ग़ज़ल Vinit Singh Shayar
Vinit kumar
"बेदर्द जमाने में"
Dr. Kishan tandon kranti
🏛️ *दालान* 🏛️
🏛️ *दालान* 🏛️
सुरेश अजगल्ले 'इन्द्र '
" बेशुमार दौलत "
Chunnu Lal Gupta
Loading...