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17 Aug 2023 · 1 min read

सब गुण संपन्य छी मुदा बहिर बनि अपने तालें नचैत छी !

सब गुण संपन्य छी मुदा बहिर बनि अपने तालें नचैत छी !
नहिं ककरों सँ संवाद केलहूँ लोक बुझत गुमान करैत छी !!
@ परिमल

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