Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
20 Apr 2023 · 1 min read

सत्य को अपना बना लो,

सत्य को अपना बना लो,
दर्पण को भी झुठला दो,
दिखे जो प्रतिबिम्ब औरोंं में,
भ्रम है बखूबी से ठुकरा दो।

बुद्ध प्रकाश
मौदहा हमीरपुर।

2 Likes · 192 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Buddha Prakash
View all
You may also like:
दिया है नसीब
दिया है नसीब
Santosh Shrivastava
#गौरवमयी_प्रसंग
#गौरवमयी_प्रसंग
*प्रणय प्रभात*
*लम्हा  प्यारा सा पल में  गुजर जाएगा*
*लम्हा प्यारा सा पल में गुजर जाएगा*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
पहला अहसास
पहला अहसास
Falendra Sahu
एक छोर नेता खड़ा,
एक छोर नेता खड़ा,
Sanjay ' शून्य'
संकल्प
संकल्प
Dr. Pradeep Kumar Sharma
"क्या-क्या करते"
Dr. Kishan tandon kranti
तेरे हम है
तेरे हम है
Dinesh Kumar Gangwar
सज्जन पुरुष दूसरों से सीखकर
सज्जन पुरुष दूसरों से सीखकर
Bhupendra Rawat
पहली नजर का जादू दिल पे आज भी है
पहली नजर का जादू दिल पे आज भी है
VINOD CHAUHAN
हाथों में डिग्री आँखों में निराशा,
हाथों में डिग्री आँखों में निराशा,
शेखर सिंह
रास्ता दो तो हम भी चार कदम आगे बढ़ें...
रास्ता दो तो हम भी चार कदम आगे बढ़ें...
Shweta Soni
लोगो का व्यवहार
लोगो का व्यवहार
Ranjeet kumar patre
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
-- दिखावटी लोग --
-- दिखावटी लोग --
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
परिवर्तन विकास बेशुमार🧭🛶🚀🚁
परिवर्तन विकास बेशुमार🧭🛶🚀🚁
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
*चालू झगड़े हैं वहॉं, संस्था जहॉं विशाल (कुंडलिया)*
*चालू झगड़े हैं वहॉं, संस्था जहॉं विशाल (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
करोगे रूह से जो काम दिल रुस्तम बना दोगे
करोगे रूह से जो काम दिल रुस्तम बना दोगे
आर.एस. 'प्रीतम'
गुलाम
गुलाम
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
प्रभु हैं खेवैया
प्रभु हैं खेवैया
Dr. Upasana Pandey
छह ऋतु, बारह मास हैं, ग्रीष्म-शरद-बरसात
छह ऋतु, बारह मास हैं, ग्रीष्म-शरद-बरसात
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
*** पुद्दुचेरी की सागर लहरें...! ***
*** पुद्दुचेरी की सागर लहरें...! ***
VEDANTA PATEL
2772. *पूर्णिका*
2772. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
यह तुम्हारी नफरत ही दुश्मन है तुम्हारी
यह तुम्हारी नफरत ही दुश्मन है तुम्हारी
gurudeenverma198
याद आया मुझको बचपन मेरा....
याद आया मुझको बचपन मेरा....
Harminder Kaur
बिना पंख फैलाये पंछी को दाना नहीं मिलता
बिना पंख फैलाये पंछी को दाना नहीं मिलता
Anil Mishra Prahari
लोग बस दिखाते है यदि वो बस करते तो एक दिन वो खुद अपने मंज़िल
लोग बस दिखाते है यदि वो बस करते तो एक दिन वो खुद अपने मंज़िल
Rj Anand Prajapati
मय है मीना है साकी नहीं है।
मय है मीना है साकी नहीं है।
सत्य कुमार प्रेमी
*Each moment again I save*
*Each moment again I save*
Poonam Matia
अफ़सोस
अफ़सोस
Dipak Kumar "Girja"
Loading...