Sep 5, 2016 · 1 min read

सच में लगा इंसान सा……

एकांत में
चुपचाप सा
शांत सा
मगन में मगन
इंसान सा,
तल्लीन किसी लय में
ऊँगली से बजती चुटकी को
संगीत बना,
कुछ गुनगुना रहा था मन ही मन
दिल के शब्द,
जो उसके गीत बन गये
चुटकी की संगीत के साथ,
सकुन के पल थे वो
बेफिक्र सा चेहरा
सच में लगा इंसान सा
जो डूबा था अपने गीत में
अपने संगीत में,
न हार में, न जीत में
अपनी ही दुनियां में खो रहा था
सो रहा था चैन की नींद
कुछ पल ही सही,
इस दुनियां में
सच में लगा इंसान सा।

^^^^^^^दिनेश शर्मा^^^^^^^

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