Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 May 2024 · 1 min read

#शीर्षक;-ले लो निज अंक मॉं

#दिनांक:-5/5/2024
#शीर्षक;-ले लो निज अंक मॉं

डूबती नैया को पार लगाओ,
माँ दुर्गा हमें आशीर्वाद देने आओ ।
अस्त्र-शस्त्र नवरूप धारण कर,
पापियों का नाश करने आओ।

सुकोमल भाव समर्पित कमलासिनी,
तू ही ब्रह्माणी,रूद्राणी,पर्वतवासिनी।
शिव प्रिया बामांक सुशोभिता,
रक्षा करो मातु दुख निवारिणी।

अलौकिक दिव्य ज्योति तुम्हारी,
माँ ! तुमको पूजते सारे नर-नारी।
भक्तिमय हो जाता महीना संवत्सर,
दुष्ट-दानव पर सदा रहती भारी।

माँ की मूरत मोहिनी ममतामयी,
कृपालु कल्याणकारी करुणामयी।
मिटे जन-मन कल्मष-अंधियारा,
मनोहारी माता मातंगी महिमामयी।

ले लो निज अंक हूँ दीन-दुखी माँ,
सुविचार-विवेक की दो भीख माँ।
गलतियाँ सारी क्षमा करो माता,
खुद की समझ की दो सीख माँ।

(स्वरचित)
प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

3 Likes · 58 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
लतियाते रहिये
लतियाते रहिये
विजय कुमार नामदेव
आश्रम
आश्रम
इंजी. संजय श्रीवास्तव
ईश्वर का घर
ईश्वर का घर
Dr MusafiR BaithA
जब आपके आस पास सच बोलने वाले न बचे हों, तो समझिए आस पास जो भ
जब आपके आस पास सच बोलने वाले न बचे हों, तो समझिए आस पास जो भ
Sanjay ' शून्य'
मैं सुर हूॅ॑ किसी गीत का पर साज तुम्ही हो
मैं सुर हूॅ॑ किसी गीत का पर साज तुम्ही हो
VINOD CHAUHAN
नजर  नहीं  आता  रास्ता
नजर नहीं आता रास्ता
Nanki Patre
सपने सारे टूट चुके हैं ।
सपने सारे टूट चुके हैं ।
Arvind trivedi
सताती दूरियाँ बिलकुल नहीं उल्फ़त हृदय से हो
सताती दूरियाँ बिलकुल नहीं उल्फ़त हृदय से हो
आर.एस. 'प्रीतम'
' नये कदम विश्वास के '
' नये कदम विश्वास के '
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
आत्महत्या कर के भी, मैं जिंदा हूं,
आत्महत्या कर के भी, मैं जिंदा हूं,
Pramila sultan
पेशवा बाजीराव बल्लाल भट्ट
पेशवा बाजीराव बल्लाल भट्ट
Ajay Shekhavat
अमरत्व
अमरत्व
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
साँप और इंसान
साँप और इंसान
Prakash Chandra
वक़्त की पहचान🙏
वक़्त की पहचान🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
गोरा है वो फिर भी काला लगता है।
गोरा है वो फिर भी काला लगता है।
सत्य कुमार प्रेमी
This Love That Feels Right!
This Love That Feels Right!
R. H. SRIDEVI
"जिन्दगी"
Dr. Kishan tandon kranti
*कांच से अल्फाज़* पर समीक्षा *श्रीधर* जी द्वारा समीक्षा
*कांच से अल्फाज़* पर समीक्षा *श्रीधर* जी द्वारा समीक्षा
Surinder blackpen
नारी तेरे रूप अनेक
नारी तेरे रूप अनेक
विजय कुमार अग्रवाल
*छाई है छवि राम की, दुनिया में चहुॅं ओर (कुंडलिया)*
*छाई है छवि राम की, दुनिया में चहुॅं ओर (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
इन आँखों को भी अब हकीम की जरूरत है..
इन आँखों को भी अब हकीम की जरूरत है..
Tarun Garg
अब तो इस वुज़ूद से नफ़रत होने लगी मुझे।
अब तो इस वुज़ूद से नफ़रत होने लगी मुझे।
Phool gufran
कुछ औरतें खा जाती हैं, दूसरी औरतों के अस्तित्व । उनके सपने,
कुछ औरतें खा जाती हैं, दूसरी औरतों के अस्तित्व । उनके सपने,
पूर्वार्थ
अपने ज्ञान को दबा कर पैसा कमाना नौकरी कहलाता है!
अपने ज्ञान को दबा कर पैसा कमाना नौकरी कहलाता है!
Suraj kushwaha
24/241. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
24/241. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
अनजान दीवार
अनजान दीवार
Mahender Singh
🙅आज की बात🙅
🙅आज की बात🙅
*प्रणय प्रभात*
अभी कुछ बरस बीते
अभी कुछ बरस बीते
shabina. Naaz
सावन का महीना है भरतार
सावन का महीना है भरतार
Ram Krishan Rastogi
मैं चाहती हूँ
मैं चाहती हूँ
Shweta Soni
Loading...