Oct 22, 2016 · 1 min read

शिखरिनी ( हाइकू):: जितेंद्रकमलआनंद: जग असार( पो ७७)

शिखरिनी छंद
——————
जग असार
किंतु परम ब्रह्म ।
हैं सारात्सार ।।४!!

सर्व विज्ञाता
परमब्रह्म ही हैं —
सर्वान्तरात्मा ।।५!!

मानव धर्म
नैतिकता पूर्ण है —
करना कर्म ।।६ ।।

——- जितेंद्र कमल आनंद

1 Like · 1 Comment · 132 Views
You may also like:
गैरों की क्या बात करें
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
बाबा साहेब जन्मोत्सव
Mahender Singh Hans
(((मन नहीं लगता)))
दिनेश एल० "जैहिंद"
स्वेद का, हर कण बताता, है जगत ,आधार तुम से।।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
दीया तले अंधेरा
Vikas Sharma'Shivaaya'
आप कौन है
Sandeep Albela
दिल्ली की कहानी मेरी जुबानी [हास्य व्यंग्य! ]
Anamika Singh
मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है
Pt. Brajesh Kumar Nayak
हायकु
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
अभी बाकी है
Lamhe zindagi ke by Pooja bharadawaj
ख़ूब समझते हैं ghazal by Vinit Singh Shayar
Vinit Singh
इश्क़ में जूतियों का भी रहता है डर
आकाश महेशपुरी
वो काली रात...!
मनोज कर्ण
पिता
Dr. Kishan Karigar
अधजल गगरी छलकत जाए
Vishnu Prasad 'panchotiya'
माँ
आकाश महेशपुरी
हिन्दी दोहे विषय- नास्तिक (राना लिधौरी)
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
मिला है जब से साथ तुम्हारा
Ram Krishan Rastogi
जीवन-दाता
Prabhudayal Raniwal
वार्तालाप….
Piyush Goel
राम नाम ही परम सत्य है।
Anamika Singh
प्रिय सुनो!
Shailendra Aseem
प्रेरक संस्मरण
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
मौन में गूंजते शब्द
Manisha Manjari
अजीब कशमकश
Anjana Jain
हे तात ! कहा तुम चले गए...
मनोज कर्ण
मयंक के जन्मदिन पर बधाई
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
क्या कोई मुझे भी बताएगा
Krishan Singh
उम्मीद से भरा
Dr.sima
सूरज का ताप
सतीश मिश्र "अचूक"
Loading...