Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 May 2023 · 1 min read

शायरी 2

तेरी ये जुल्फ़ें, तेरी ये नज़रें,
मेरे तसव्वुर में सिर्फ़ तू है।
कहाँ है, तेरा पता नहीं है ,
मुझे तो बस तेरी जुस्तजू है।
यक़ीं भले ही तुम्हें ना हो पर,
मेरा तबस्सुम है तेरी ख़ातिर।
पता नहीं हाले-दिल का, क्या है?
मगर नज़र से तो गुफ़्तगू है।।

2 Likes · 2 Comments · 420 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
मैं तन्हाई में, ऐसा करता हूँ
मैं तन्हाई में, ऐसा करता हूँ
gurudeenverma198
गाय
गाय
Vedha Singh
भूख सोने नहीं देती
भूख सोने नहीं देती
Shweta Soni
मेरा दुश्मन मेरा मन
मेरा दुश्मन मेरा मन
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
न किसी से कुछ कहूँ
न किसी से कुछ कहूँ
ruby kumari
तुमसे ही दिन मेरा तुम्ही से होती रात है,
तुमसे ही दिन मेरा तुम्ही से होती रात है,
AVINASH (Avi...) MEHRA
झरते फूल मोहब्ब्त के
झरते फूल मोहब्ब्त के
Arvina
Hello Sun!
Hello Sun!
Buddha Prakash
We make Challenges easy and
We make Challenges easy and
Bhupendra Rawat
जीवन के अंतिम दिनों में गौतम बुद्ध
जीवन के अंतिम दिनों में गौतम बुद्ध
कवि रमेशराज
ख़त पहुंचे भगतसिंह को
ख़त पहुंचे भगतसिंह को
Shekhar Chandra Mitra
मोर छत्तीसगढ़ महतारी हे
मोर छत्तीसगढ़ महतारी हे
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
अतिथि हूं......
अतिथि हूं......
Ravi Ghayal
*नयी पीढ़ियों को दें उपहार*
*नयी पीढ़ियों को दें उपहार*
Poonam Matia
जवानी में तो तुमने भी गजब ढाया होगा
जवानी में तो तुमने भी गजब ढाया होगा
Ram Krishan Rastogi
फागुनी है हवा
फागुनी है हवा
surenderpal vaidya
दोहा
दोहा
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
#साहित्यपीडिया
#साहित्यपीडिया
*Author प्रणय प्रभात*
मेला
मेला
Dr.Priya Soni Khare
परिणति
परिणति
Shyam Sundar Subramanian
आसमान में छाए बादल, हुई दिवस में रात।
आसमान में छाए बादल, हुई दिवस में रात।
डॉ.सीमा अग्रवाल
टूट कर भी
टूट कर भी
Dr fauzia Naseem shad
हमें अब राम के पदचिन्ह पर चलकर दिखाना है
हमें अब राम के पदचिन्ह पर चलकर दिखाना है
Dr Archana Gupta
मैं तुलसी तेरे आँगन की
मैं तुलसी तेरे आँगन की
Shashi kala vyas
Khuch rishte kbhi bhulaya nhi karte ,
Khuch rishte kbhi bhulaya nhi karte ,
Sakshi Tripathi
सफ़र में लाख़ मुश्किल हो मगर रोया नहीं करते
सफ़र में लाख़ मुश्किल हो मगर रोया नहीं करते
Johnny Ahmed 'क़ैस'
"उम्मीद का दीया"
Dr. Kishan tandon kranti
जो लोग बिछड़ कर भी नहीं बिछड़ते,
जो लोग बिछड़ कर भी नहीं बिछड़ते,
शोभा कुमारी
अब मैं बस रुकना चाहता हूं।
अब मैं बस रुकना चाहता हूं।
PRATIK JANGID
2530.पूर्णिका
2530.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
Loading...