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30 Jul 2016 · 1 min read

शहंशाह

जो बीत गया पल
सुख का भी था
दुःख का भी
मन में था बोझ
बीते पल का जो
आनंद की लहरो को उठने नहीं देता था,
जाने क्यों व्यर्थ बोझ ढो रहा था
आनंद को खोज रहा था बाहर की
दुनियां में,भटकते भटकते अंदर उतर गया
हल्का और शांत हो गया
व्यर्थ के बोझ से
वहां आनंद था केवल आनंद
जिसको पाकर शहंशाह के भी शहंशाह
हो गए फकीर***
^^^दिनेश शर्मा^^^

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Comment · 214 Views
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