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16 Jul 2020 · 1 min read

वक़्त तिरे पहलू में ठहरे

काश कि दर्द, दवा बन जाये
ग़म भी एक, नशा बन जाये

वक़्त तिरे पहलू में ठहरे
तेरी एक, अदा बन जाये

तुझसे बेबाक हँसी लेकर
इक मासूम, खुदा बन जाये

लैला-मजनूँ, फरहाद-सिरी
ऐसी पाक, वफ़ा बन जाये

कुछ उनका सन्देश भी दे दो
काश! कि प्यार, सबा बन जाये

2 Comments · 168 Views
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