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व्यथा

सभी कहते हैं
उत्तर दिशा बहुत शुभ होती है

मैंने भी सुना है
सूर्य जब अंतरण करता है
उत्तर दिशा की ओर
तिल तिल बढ़ती चली जाती हैं खुशियाँ

फिर दिन प्रतिदिन
अग्नि, ज्योति व प्रकाश से
होने लगता है जीवन
तेजस्वी और प्रकाशमय भी
यूँ ही होने लगती हैं
दुःखों से खुशियों की संक्रांति

एक प्रश्न मेरे भी मस्तिष्क में
बार बार कौंध जाता है
यदि उत्तर दिशा इतनी शुभ होती है
तो मैं भी तो तुम्हारी वामांगी हूँ
फिर मैं अशुभ कैसे?

लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’
भोपाल

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