Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Mar 2024 · 1 min read

वेतन की चाहत लिए एक श्रमिक।

है घर द्वार उसके भी।
है उसकी भी कुछ लालसा।
घसीटता,रगड़ता करता श्रम।
चंद रुपए की लिए दिलासा।
मिलता न अगर उसे धन।
रहता है वो मारे मन।
हो गए हो जो तुम धनाढ्य।
उन श्रमिकों के श्रमदान से।
लगाए घर पर आशा।
जरुरतों को पूरा करने को बैठी है बीवी।
बेटों की फीस,खेतो में खाद।
चलाने को खर्च घर का स्वाभिमान से।
रक्त उबलता है,पसीना निकलता है।
तब जाकर हाथ में ये पैसा मिलता है।
खेलो न तुम उनके बेबसी से।
गरीबी को देखो तुम उतरकर जमी से।
इक निवाला और प्याला के।
वो है आंखो में लिए नमी से।
हाय लगती है जब किसी लाचार की।
तो रोक नहीं सकता कोई तकदीर के मार की।
ये जनता ही है तुमको राजा बनाया।
उनके ही खून पसीने से तुमने घर सजाया।
आनंद बहुत बेकल है मन से।
करता न मन मस्तिष्क काम।
जब हीन हो धन से।

RJ Anand Prajapati

Language: Hindi
53 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
सुखी को खोजन में जग गुमया, इस जग मे अनिल सुखी मिला नहीं पाये
सुखी को खोजन में जग गुमया, इस जग मे अनिल सुखी मिला नहीं पाये
Anil chobisa
Mai koi kavi nhi hu,
Mai koi kavi nhi hu,
Sakshi Tripathi
विनती
विनती
Saraswati Bajpai
* नाम रुकने का नहीं *
* नाम रुकने का नहीं *
surenderpal vaidya
चुप रहना भी तो एक हल है।
चुप रहना भी तो एक हल है।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
दोहा त्रयी. . .
दोहा त्रयी. . .
sushil sarna
आज कल कुछ इस तरह से चल रहा है,
आज कल कुछ इस तरह से चल रहा है,
kumar Deepak "Mani"
क्यों गए थे ऐसे आतिशखाने में ,
क्यों गए थे ऐसे आतिशखाने में ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
राम तेरी माया
राम तेरी माया
Swami Ganganiya
खुद का वजूद मिटाना पड़ता है
खुद का वजूद मिटाना पड़ता है
कवि दीपक बवेजा
जिंदगी सितार हो गयी
जिंदगी सितार हो गयी
Mamta Rani
रखो कितनी भी शराफत वफा सादगी
रखो कितनी भी शराफत वफा सादगी
Mahesh Tiwari 'Ayan'
23/189.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/189.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
ॐ
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
फासलों से
फासलों से
Dr fauzia Naseem shad
कल कल करती बेकल नदियां
कल कल करती बेकल नदियां
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
"जीवन अब तक हुआ
*Author प्रणय प्रभात*
तुम चंद्रछवि मृगनयनी हो, तुम ही तो स्वर्ग की रंभा हो,
तुम चंद्रछवि मृगनयनी हो, तुम ही तो स्वर्ग की रंभा हो,
SPK Sachin Lodhi
वो सारी खुशियां एक तरफ लेकिन तुम्हारे जाने का गम एक तरफ लेकि
वो सारी खुशियां एक तरफ लेकिन तुम्हारे जाने का गम एक तरफ लेकि
★ IPS KAMAL THAKUR ★
हम तुमको अपने दिल में यूँ रखते हैं
हम तुमको अपने दिल में यूँ रखते हैं
Shweta Soni
विकलांगता : नहीं एक अभिशाप
विकलांगता : नहीं एक अभिशाप
Dr. Upasana Pandey
आँखों में सुरमा, जब लगातीं हों तुम
आँखों में सुरमा, जब लगातीं हों तुम
The_dk_poetry
*शाकाहारी भोज, रोज सब सज्जन खाओ (कुंडलिया)*
*शाकाहारी भोज, रोज सब सज्जन खाओ (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
ऐसा तूफान उत्पन्न हुआ कि लो मैं फँस गई,
ऐसा तूफान उत्पन्न हुआ कि लो मैं फँस गई,
Sukoon
जब हासिल हो जाए तो सब ख़ाक़ बराबर है
जब हासिल हो जाए तो सब ख़ाक़ बराबर है
Vishal babu (vishu)
तरस रहा हर काश्तकार
तरस रहा हर काश्तकार
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
साईं बाबा
साईं बाबा
Sidhartha Mishra
"The Deity in Red"
Manisha Manjari
औरतें
औरतें
Kanchan Khanna
मस्जिद से अल्लाह का एजेंट भोंपू पर बोल रहा है
मस्जिद से अल्लाह का एजेंट भोंपू पर बोल रहा है
Dr MusafiR BaithA
Loading...