Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 Oct 2016 · 2 min read

‘ विरोधरस ‘—9. || विरोधरस के आलम्बनों के वाचिक अनुभाव || +रमेशराज

अत्याचारी, दुराचारी व्यक्ति विष के घड़े, कुत्सित इरादों से लैस, छल और अहंकार से भरे होते हैं। उनकी कटूक्तियों व गर्वोक्तियों का उद्देश्य दूसरे के मर्म को चोट पहुंचाना, अपमानित करना होता है। वह अपनी विषैली वाणी से दूसरों को पराजित करने के उद्देश्य से हमेशा तीक्ष्ण और चुभने वाली बातें करते हैं। अश्लील गालियों की बौछार ही उनका अन्य प्राणियों का स्वागत या सत्कार होता है।
विरोध-रस के आलंबन एक ऐसी बीमारी या हीनग्रन्थि के शिकार, हर प्रकार से मक्कार तत्त्व होते हैं जो अपने को दूसरों से श्रेष्ठ साबित करने के लिए सदैव झूठ, छल का सहारा लेते हैं। अनीति का साम्राज्य स्थापित करने वाली उनकी वाणी यदि कभी विनम्र होती भी है तो उसके पीछे उनकी स्वार्थपूर्ति छुपी होती है।
विरोध-रस के आलंबनों के वचन तीर या तलवार की तरह सज्जनों के मन में घाव करते हैं। ये धूर्त्त लोग वैसे तो बहुत बढ़-चढ़ कर बातें करते हैं, किंतु बात जब न्याय की आती है तो इनकी जुबान बर्फ जैसी जम जाती है-
आये इतिहास में इंसाफ के अवसर कितने,
भीष्म-सी साध गये चुप्पियां गुरुवर कितने?
-राजेश मेहरोत्रा, कबीर जिंदा है [तेवरी-संग्रह ] पृ. 12

स्वार्थ की गीता सभी गाने लगे हैं,
सभ्यता को बेचकर खाने लगे हैं।
-गिरिमोहन गुरु, कबीर जिन्दा है [तेवरी-संग्रह ] पृ. 20

देके दुहाई धर्म की, मजहब की देखिए,
नफरत से आज खाइयों को पाटते हैं ये।
-गिरिमोहन गुरु, कबीर जिंदा है [तेवरी-संग्रह ] पृ.24

भारत में जन-जन को हिंदी अपनानी है,
अंगरेजी में समझाते हैं जनसेवकजी।
-रमेशराज, इतिहास घायल है [तेवरी-संग्रह ] पृ.44

बोल खुशबू में घुले हैं,
शिष्टता दुर्गंधमय है।
+सुरेश त्रस्त, इतिहास घायल है [तेवरी-संग्रह ] पृ. 32

धर्म के उपदेशकों ने आजकल
शांति का प्रस्ताव ठुकराया हुआ है।
-दर्शन बेज़ार, एक प्रहारः लगातार [तेवरी-संग्रह ] पृ.15

बड़ी-बड़ी डींगें अपना तकिया कलाम हैं
हम हैं फन्नेखान दिवाने, धत्त तेरे की।
-राजेंद्र मिलन, सूर्य का उजाला, समीक्षा अंक, पृ.2
+रमेशराज की पुस्तक ‘ विरोधरस ’ से
——————————————————————-
+रमेशराज, 15/109, ईसानगर, अलीगढ़-202001

Language: Hindi
Tag: लेख
276 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी
फल आयुष्य
फल आयुष्य
DR ARUN KUMAR SHASTRI
ऐसे न देख पगली प्यार हो जायेगा ..
ऐसे न देख पगली प्यार हो जायेगा ..
Yash mehra
3287.*पूर्णिका*
3287.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
भ्रम नेता का
भ्रम नेता का
Sanjay ' शून्य'
सत्य की खोज
सत्य की खोज
Srishty Bansal
हमें रामायण
हमें रामायण
Dr.Rashmi Mishra
*झूला सावन मस्तियॉं, काले मेघ फुहार (कुंडलिया)*
*झूला सावन मस्तियॉं, काले मेघ फुहार (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
*My Decor*
*My Decor*
Poonam Matia
"जियो जिन्दगी"
Dr. Kishan tandon kranti
संवेदना
संवेदना
Ekta chitrangini
यूँ  भी  हल्के  हों  मियाँ बोझ हमारे  दिल के
यूँ भी हल्के हों मियाँ बोझ हमारे दिल के
Sarfaraz Ahmed Aasee
■ हिंदी सप्ताह के समापन पर ■
■ हिंदी सप्ताह के समापन पर ■
*Author प्रणय प्रभात*
नया सवेरा
नया सवेरा
AMRESH KUMAR VERMA
*कैसे  बताएँ  कैसे जताएँ*
*कैसे बताएँ कैसे जताएँ*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
जन्माष्टमी महोत्सव
जन्माष्टमी महोत्सव
Neeraj Agarwal
मेरी कलम से…
मेरी कलम से…
Anand Kumar
मायका वर्सेज ससुराल
मायका वर्सेज ससुराल
Dr. Pradeep Kumar Sharma
** चीड़ के प्रसून **
** चीड़ के प्रसून **
लक्ष्मण 'बिजनौरी'
आप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए
आप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए
Ram Krishan Rastogi
Safed panne se rah gayi h meri jindagi
Safed panne se rah gayi h meri jindagi
Sakshi Tripathi
काश असल पहचान सबको अपनी मालूम होती,
काश असल पहचान सबको अपनी मालूम होती,
manjula chauhan
आज़ादी का जश्न
आज़ादी का जश्न
Shekhar Chandra Mitra
जीवन
जीवन
Bodhisatva kastooriya
मुनाफे में भी घाटा क्यों करें हम।
मुनाफे में भी घाटा क्यों करें हम।
सत्य कुमार प्रेमी
।। श्री सत्यनारायण कथा द्वितीय अध्याय।।
।। श्री सत्यनारायण कथा द्वितीय अध्याय।।
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
मार गई मंहगाई कैसे होगी पढ़ाई🙏✍️🙏
मार गई मंहगाई कैसे होगी पढ़ाई🙏✍️🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
बस अणु भर मैं
बस अणु भर मैं
Atul "Krishn"
स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
दूर चकोरी तक रही अकास...
दूर चकोरी तक रही अकास...
डॉ.सीमा अग्रवाल
Loading...