Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Jun 2018 · 1 min read

विधाता छंद “मुक्तक”

समय के साथ तो हमको, कभी ढलना नहीं आया I
नदी के संग धारा में, ………हमें बहना नहीं आया I
ख्वाहिशें हो नही पाई,कभी भी आज तक पूरी,
हमें कहना नहीं आया, उन्हें सुनना नहीं आया I
रमेश शर्मा

Language: Hindi
1 Like · 554 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
संविधान का पालन
संविधान का पालन
विजय कुमार अग्रवाल
कुछ लोग ऐसे भी मिले जिंदगी में
कुछ लोग ऐसे भी मिले जिंदगी में
शेखर सिंह
2514.पूर्णिका
2514.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
आओ चले अब बुद्ध की ओर
आओ चले अब बुद्ध की ओर
Buddha Prakash
🙅in world🙅
🙅in world🙅
*प्रणय प्रभात*
किसी को जिंदगी लिखने में स्याही ना लगी
किसी को जिंदगी लिखने में स्याही ना लगी
कवि दीपक बवेजा
दिए जलाओ प्यार के
दिए जलाओ प्यार के
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
रात में कर देते हैं वे भी अंधेरा
रात में कर देते हैं वे भी अंधेरा
सिद्धार्थ गोरखपुरी
होते फलित यदि शाप प्यारे
होते फलित यदि शाप प्यारे
Suryakant Dwivedi
चीत्कार रही मानवता,मानव हत्याएं हैं जारी
चीत्कार रही मानवता,मानव हत्याएं हैं जारी
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
याद आयेगा हमें .....ग़ज़ल
याद आयेगा हमें .....ग़ज़ल
sushil sarna
प्यार के मायने बदल गयें हैं
प्यार के मायने बदल गयें हैं
SHAMA PARVEEN
थक गये चौकीदार
थक गये चौकीदार
Shyamsingh Lodhi Rajput (Tejpuriya)
बधाई हो बधाई, नये साल की बधाई
बधाई हो बधाई, नये साल की बधाई
gurudeenverma198
खुशी(👇)
खुशी(👇)
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
मोरनी जैसी चाल
मोरनी जैसी चाल
Dr. Vaishali Verma
करवाचौथ
करवाचौथ
Neeraj Agarwal
मां आई
मां आई
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
कुछ लोगो के लिए आप महत्वपूर्ण नही है
कुछ लोगो के लिए आप महत्वपूर्ण नही है
पूर्वार्थ
धन की खाई कमाई से भर जाएगी। वैचारिक कमी तो शिक्षा भी नहीं भर
धन की खाई कमाई से भर जाएगी। वैचारिक कमी तो शिक्षा भी नहीं भर
Sanjay ' शून्य'
गजल
गजल
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
*अब सब दोस्त, गम छिपाने लगे हैं*
*अब सब दोस्त, गम छिपाने लगे हैं*
shyamacharan kurmi
*कमबख़्त इश्क़*
*कमबख़्त इश्क़*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
आइये झांकते हैं कुछ अतीत में
आइये झांकते हैं कुछ अतीत में
Atul "Krishn"
"एक नज़्म लिख रहा हूँ"
Lohit Tamta
ग़ज़ल/नज़्म - शाम का ये आसमांँ आज कुछ धुंधलाया है
ग़ज़ल/नज़्म - शाम का ये आसमांँ आज कुछ धुंधलाया है
अनिल कुमार
मुस्कुराहट
मुस्कुराहट
Santosh Shrivastava
रामकली की दिवाली
रामकली की दिवाली
Dr. Pradeep Kumar Sharma
"लक्षण"
Dr. Kishan tandon kranti
तेरे मन मंदिर में जगह बनाऊं मै कैसे
तेरे मन मंदिर में जगह बनाऊं मै कैसे
Ram Krishan Rastogi
Loading...