Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Jul 2023 · 1 min read

विद्रोही प्रेम

तुमने ओक्टोपस तो देखा होगा
उसकी भुजाएँ भी
जब कुछ पाना चाहती हैं
अपनी आठों बाहें फैला लेती है
वैसे ही
मैं करती हूँ तुम्हें प्रेम

और इतने प्रेम के बदले
कुछ मांगू भी नहीं
क्यों……????
पर ये भी तो सोच रही हूँ
तुमको तो पा ही चुकी हूँ
बचा क्या…..????

बचा है न
मेरे विद्रोह का श्रृंगार…..

#रश्मि_रश
#विद्रोही_मन

Language: Hindi
169 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
सावन आज फिर उमड़ आया है,
सावन आज फिर उमड़ आया है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
#ग़ज़ल-
#ग़ज़ल-
*प्रणय प्रभात*
जनाब पद का नहीं किरदार का गुरुर कीजिए,
जनाब पद का नहीं किरदार का गुरुर कीजिए,
शेखर सिंह
प्यार करें भी तो किससे, हर जज़्बात में खलइश है।
प्यार करें भी तो किससे, हर जज़्बात में खलइश है।
manjula chauhan
संदेश
संदेश
Shyam Sundar Subramanian
आंदोलन की जरूरत क्यों है
आंदोलन की जरूरत क्यों है
नेताम आर सी
नेह का दीपक
नेह का दीपक
Arti Bhadauria
सत्य की खोज
सत्य की खोज
लक्ष्मी सिंह
बिहनन्हा के हल्का सा घाम कुछ याद दीलाथे ,
बिहनन्हा के हल्का सा घाम कुछ याद दीलाथे ,
Krishna Kumar ANANT
जीवन में ईमानदारी, सहजता और सकारात्मक विचार कभीं मत छोड़िए य
जीवन में ईमानदारी, सहजता और सकारात्मक विचार कभीं मत छोड़िए य
Damodar Virmal | दामोदर विरमाल
*अध्याय 3*
*अध्याय 3*
Ravi Prakash
गुरु दक्षिणा
गुरु दक्षिणा
Dr. Pradeep Kumar Sharma
*गम को यूं हलक में  पिया कर*
*गम को यूं हलक में पिया कर*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
बेटी उड़ान पर बाप ढलान पर👸👰🙋
बेटी उड़ान पर बाप ढलान पर👸👰🙋
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
पिछले 4 5 सालों से कुछ चीजें बिना बताए आ रही है
पिछले 4 5 सालों से कुछ चीजें बिना बताए आ रही है
Paras Mishra
दिल ऐसी चीज़ है जो किसी पर भी ग़ालिब हो सकती है..
दिल ऐसी चीज़ है जो किसी पर भी ग़ालिब हो सकती है..
पूर्वार्थ
खूब रोता मन
खूब रोता मन
Dr. Sunita Singh
बहुत जरूरी है तो मुझे खुद को ढूंढना
बहुत जरूरी है तो मुझे खुद को ढूंढना
Ranjeet kumar patre
"वो जिन्दगी"
Dr. Kishan tandon kranti
बसहा चलल आब संसद भवन
बसहा चलल आब संसद भवन
मनोज कर्ण
उमंग
उमंग
Akash Yadav
दोहा
दोहा
गुमनाम 'बाबा'
मां की ममता जब रोती है
मां की ममता जब रोती है
Harminder Kaur
प्रदर्शन
प्रदर्शन
Sanjay ' शून्य'
कोशिशें हमने करके देखी हैं
कोशिशें हमने करके देखी हैं
Dr fauzia Naseem shad
2876.*पूर्णिका*
2876.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
24)”मुस्करा दो”
24)”मुस्करा दो”
Sapna Arora
देख बहना ई कैसा हमार आदमी।
देख बहना ई कैसा हमार आदमी।
सत्य कुमार प्रेमी
फिर सुखद संसार होगा...
फिर सुखद संसार होगा...
डॉ.सीमा अग्रवाल
मनहरण घनाक्षरी
मनहरण घनाक्षरी
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
Loading...