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4 Aug 2016 · 1 min read

विकल

मैं
तो सागर हूं,
हजारों नदियां
मुझ में गिर कर अपना आस्तिव
समाप्त कर लेना चाहती हैं!
फिर भी
मैं
‘विकल’
हूं…
और मुझे तलाश है एक ऐसी नदी की
जिसमें
मैं समा जाऊं…
मैं समा जाऊं…।।
—खूब सिंह ‘विकल’

Language: Hindi
346 Views
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