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वसंत

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वसंत
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ऋतुओं का राजा वसंत।
ले आया खुशियाँ अनंत।
पीले सरसों फूल दिख रहे-
पीत वस्त्र में लिपटे संत।

पतझड़ का मौसम है भागा।
हर हृदय उमंग है जागा।
कोयल कूक रही बगिया में-
मेढ़ पे कलरव करते कागा।

मिटे प्रतीक्षा के सारे क्षण।
पुलकि है वसुधा का हर कण।
हरित धरा को देख रहे सब-
स्वर्ग लोक के सभी देव गण।

होठों पर लाया सुहास।
आया ओढ पीला लिवास।
महुआ आम्र व मधु से लेकर-
घोल रहा सब में मिठास।

झूलत श्याम श्यामा के संग।
लिपटा वसंत पुलकित अंग।
फाग खेलती राधा रानी-
सब पे चढा वसंत का रंग।
————-स्वरचित, स्वप्रमाणित
✍️पं.संजीव शुक्ल “सचिन”
मुसहरवा (मंशानगर), पश्चिमी चम्पारण,
बिहार..9560335952

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