Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 Feb 2024 · 1 min read

वसंत पंचमी

आया वसंत ऋतु में वसंत पंचमी का त्यौहार,
सुबह- सँवरे शुरू हो गयीं विद्या देवी की पुकार
विद्यालय, घर ,चाहें हो कोई द्वार ॥

शुरू हो जाती माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना की पुकार
कहीं यज्ञ, कहीं होता पीत फूलों से माँ का आदर-सत्कार॥

खिल जाती जो-गेहूँ की बालियाँ,
नाचने लग जाती रंग बिरंग़ी तितलियाँ
सजने लगती रंग़ोली से धरती माइयाँ॥

खेतों में चमकने लग जाता सरसों सा सोने का मेला
पहने सबने पीत वस्त्र ,करते माँ पर फूलों से बौछार॥

आया वसंत ऋतु में वसंत पंचमी का त्यौहार
सुबह- सँवरे शुरू हो गयी विद्या की देवी की पुकार
विद्यालय, घर ,चाहें हो कोई द्वार ॥

रचनाकार – 😇 डॉ० वैशाली ✍🏻

Language: Hindi
1 Like · 142 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
सदा किया संघर्ष सरहद पर,विजयी इतिहास हमारा।
सदा किया संघर्ष सरहद पर,विजयी इतिहास हमारा।
Neelam Sharma
यूं ही कुछ लिख दिया था।
यूं ही कुछ लिख दिया था।
Taj Mohammad
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
बोलो!... क्या मैं बोलूं...
बोलो!... क्या मैं बोलूं...
Santosh Soni
*सत्य की खोज*
*सत्य की खोज*
Dr Shweta sood
हौसला
हौसला
डॉ. शिव लहरी
अखंड भारत कब तक?
अखंड भारत कब तक?
जय लगन कुमार हैप्पी
बुंदेली दोहा- पैचान१
बुंदेली दोहा- पैचान१
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
Nature ‘there’, Nurture ‘here'( HOMEMAKER)
Nature ‘there’, Nurture ‘here'( HOMEMAKER)
Poonam Matia
तूने ही मुझको जीने का आयाम दिया है
तूने ही मुझको जीने का आयाम दिया है
हरवंश हृदय
मैं बिल्कुल आम-सा बंदा हूँ...!!
मैं बिल्कुल आम-सा बंदा हूँ...!!
Ravi Betulwala
महफिले सजाए हुए है
महफिले सजाए हुए है
Harminder Kaur
I can’t be doing this again,
I can’t be doing this again,
पूर्वार्थ
मुझे वो सब दिखाई देता है ,
मुझे वो सब दिखाई देता है ,
Manoj Mahato
*उर्मिला (कुंडलिया)*
*उर्मिला (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
दोस्तो जिंदगी में कभी कभी ऐसी परिस्थिति आती है, आप चाहे लाख
दोस्तो जिंदगी में कभी कभी ऐसी परिस्थिति आती है, आप चाहे लाख
Sunil Maheshwari
सफ़र है बाकी (संघर्ष की कविता)
सफ़र है बाकी (संघर्ष की कविता)
Dr. Kishan Karigar
"जीवन"
Dr. Kishan tandon kranti
प्रेम एक सहज भाव है जो हर मनुष्य में कम या अधिक मात्रा में स
प्रेम एक सहज भाव है जो हर मनुष्य में कम या अधिक मात्रा में स
Dr MusafiR BaithA
******* प्रेम और दोस्ती *******
******* प्रेम और दोस्ती *******
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं,
कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं,
Vishal babu (vishu)
2550.पूर्णिका
2550.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
मुखौटा!
मुखौटा!
कविता झा ‘गीत’
■ दास्य भाव के शिखर पुरूष गोस्वामी तुलसीदास
■ दास्य भाव के शिखर पुरूष गोस्वामी तुलसीदास
*प्रणय प्रभात*
आओ सजन प्यारे
आओ सजन प्यारे
Pratibha Pandey
परिवार
परिवार
Sandeep Pande
कहाॅ॑ है नूर
कहाॅ॑ है नूर
VINOD CHAUHAN
ध्रुव तारा
ध्रुव तारा
Bodhisatva kastooriya
प्रभु भक्ति में सदा डूबे रहिए
प्रभु भक्ति में सदा डूबे रहिए
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
दृष्टि
दृष्टि
Ajay Mishra
Loading...