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3 Dec 2023 · 1 min read

वफ़ाओं का सिला कोई नहीं

ऐसी है यह ख्वाहिश कि दिशा कोई नहीं है
दुनिया में वफ़ाओं का सिला कोई नहीं है

अंदर के हिमालय से निकल आई है गंगा
तूफ़ान मिरे दिल में बचा कोई नहीं है

इंसान तो क्या लोग खुदा से भी नहीं ख़ुश
इस दौर में सब का तो भला कोई नहीं है

कपड़ों में जो बाज़ू थे वह सब काट दिये हैं
साँपों का ठिकाना तो बचा कोई नहीं है

हम जब भी परखने को चले हैं यह ज़माना
महसूस हुआ, हमसे बुरा कोई नहीं है

इस दौर में क़ातिल की मसीहाई है अरशद
क़ानून की नज़रों में बुरा कोई नहीं है

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