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20 Aug 2016 · 1 min read

लोग

बंद किवाड़ो की
दरारों से झाँकते लोग
दीवारों से कान लगाकर
कुछ सुनते -सुनाते लोग
लगाकर उसमें नमक -मिरच
किस्से घडते -घडाते लोग
शब्दों केअभेद्य बांण चलाकर
दिलों को तार-तार कर जाते लोग
न सोचें न समझें
सुनी -सुनाई पर
एक दम, राय बनाते लोग
कभी हँसते साथ
तो कभी वो ही
रुलाते लोग
सामने कुछ,
पीछे कुछ और
यही दोगलापन
दिखाते हैं लोग
अपना समय
बस इसी तरह
बिताते हैं लोग
वाह रे लोग….
वाह रे लोग …..।

Language: Hindi
Tag: कविता
4 Comments · 275 Views
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