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7 Jan 2023 · 1 min read

लेखनी चलती रही

शैशवी मन के पुलक की कल्पना लिखती रही।
ज़िंदगी धर मृदुल-पग, प्रस्तावना लिखती रही।।

हो वसंती-सा गया मन, नववधू-सी वेदना,
कल्पना मधुयामिनी की कामना लिखती रही।

भावना ने प्रेम-पूरित छंद-लय सब रच दिया,
दिव्यता अभिव्यक्त हो कर, साधना लिखती रही ।।

रूपसी बन मिलन -बेला, हो रही श्रृंगार-रत,
हो समर्पित कामिनी, आराधना लिखती रही।

कर दिया अवरुद्ध जीवन-पथ बदलते बंधनों ने,
आयु विचलित रह, नई संभावना लिखती रही।।

रश्मि लहर

Language: Hindi
2 Likes · 2 Comments · 167 Views
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