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29 May 2023 · 1 min read

लाचार जन की हाय

जहां मनुष्यता को बिसरा कर
बस भवन निर्माण पर हो जोर
उस राष्ट्र और समाज की दशा
सदा सर्वदा रहती है कमजोर
भवनों से यदि हो जाता मानव
का चहुंमुखी विकास व उत्थान
तो कभी गर्त में नहीं समाए होते
जार निकोलस जैसे नृप महान
मानवता जहां सिसकती रहती
किसी के पहलू में सिर छिपाय
उस राष्ट्र के नेताओं को खा जाती
है बेबस और लाचार जन की हाय

Language: Hindi
488 Views
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