Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
19 Feb 2022 · 1 min read

राजनयिक कुछ राजनीति के …

राजनयिक कुछ राजनीति के,
आज डरा रहे हैं जनता को,
जनता बेचारी भयाक्रांत हो,
कोस रही है किस्मत को,

किस्मत भी करे, करे तो क्या,
उसका भी इन पर जोर नहीं,
ये स्वार्थ सिद्धि के सौदागर,
जिनको बिल्कुल भी हया नही,

ये मस्त मस्त बन मद्यप से,
पल पल हुंकारे भरते हैं,
चाहे देश कर्ज में डूब जाय,
पर ये घोटाले करते हैं,

गर देशभक्ति की बात चले,
ये भाषण देते बड़ा बड़ा,
फिर डटकर मौज मनाते हैं,
चाहे सिसके भारत पड़ा पड़ा,

अस्मत भी इनके शासन में,
बच जाए तो है बड़ी बात,
क्योंकि कारवाँ दुष्टों का,
पलता है इनके साथ-साथ,

हे कूटनीति के कठपुतलो,
कुछ तो सोचो, कुछ शर्म करो,
मत चूसो खून गरीबों का,
कुछ देश-धर्म की बात करो,

जब मिट जायेगी यही शक्ति,
जिसके बल पर इतराते हो,
सच को झूठ, झूठ को सच्चा,
उजले को स्याह बनाते हो,

तब हे ‘माया’ के ‘मानस-पुत्रो’,
वोट तुम्हारे देगा कौन,
जब तुम्हरे कुटिल करतबों से,
यह सृष्टि हो जायेगी मौन।

✍ सुनील सुमन

Language: Hindi
2 Comments · 625 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Sunil Suman
View all
You may also like:
प्यार भरी चांदनी रात
प्यार भरी चांदनी रात
नूरफातिमा खातून नूरी
आपकी तस्वीर ( 7 of 25 )
आपकी तस्वीर ( 7 of 25 )
Kshma Urmila
फ्राॅड की कमाई
फ्राॅड की कमाई
Punam Pande
क्या कहूँ
क्या कहूँ
Ajay Mishra
जितने चंचल है कान्हा
जितने चंचल है कान्हा
Harminder Kaur
कुछ रिश्तो में हम केवल ..जरूरत होते हैं जरूरी नहीं..! अपनी अ
कुछ रिश्तो में हम केवल ..जरूरत होते हैं जरूरी नहीं..! अपनी अ
पूर्वार्थ
2989.*पूर्णिका*
2989.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
दिनांक - २१/५/२०२३
दिनांक - २१/५/२०२३
संजीव शुक्ल 'सचिन'
फूल खिले हैं डाली-डाली,
फूल खिले हैं डाली-डाली,
Vedha Singh
ग़ज़ल:- तेरे सम्मान की ख़ातिर ग़ज़ल कहना पड़ेगी अब...
ग़ज़ल:- तेरे सम्मान की ख़ातिर ग़ज़ल कहना पड़ेगी अब...
अरविन्द राजपूत 'कल्प'
गजब है सादगी उनकी
गजब है सादगी उनकी
sushil sarna
8-मेरे मुखड़े को सूरज चाँद से माँ तोल देती है
8-मेरे मुखड़े को सूरज चाँद से माँ तोल देती है
Ajay Kumar Vimal
*”ममता”* पार्ट-1
*”ममता”* पार्ट-1
Radhakishan R. Mundhra
🌸दे मुझे शक्ति🌸
🌸दे मुझे शक्ति🌸
सुरेश अजगल्ले 'इन्द्र '
मौत के बाज़ार में मारा गया मुझे।
मौत के बाज़ार में मारा गया मुझे।
Phool gufran
हमको तू ऐसे नहीं भूला, बसकर तू परदेश में
हमको तू ऐसे नहीं भूला, बसकर तू परदेश में
gurudeenverma198
बच्चे कहाँ सोयेंगे...???
बच्चे कहाँ सोयेंगे...???
Kanchan Khanna
लिख सकता हूँ ।।
लिख सकता हूँ ।।
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
दिल  में हसरत  जगे तो दबाना नहीं।
दिल में हसरत जगे तो दबाना नहीं।
सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’
"स्टिंग ऑपरेशन"
Dr. Kishan tandon kranti
विचार पसंद आए _ पढ़ लिया कीजिए ।
विचार पसंद आए _ पढ़ लिया कीजिए ।
Rajesh vyas
मन की प्रीत
मन की प्रीत
भरत कुमार सोलंकी
*संपूर्ण रामचरितमानस का पाठ: दैनिक समीक्षा* दिनांक 5 अप्रैल
*संपूर्ण रामचरितमानस का पाठ: दैनिक समीक्षा* दिनांक 5 अप्रैल
Ravi Prakash
*Maturation*
*Maturation*
Poonam Matia
एक गुलाब हो
एक गुलाब हो
हिमांशु Kulshrestha
सारे  ज़माने  बीत  गये
सारे ज़माने बीत गये
shabina. Naaz
श्री रामचरितमानस में कुछ स्थानों पर घटना एकदम से घटित हो जाती है ऐसे ही एक स्थान पर मैंने यह
श्री रामचरितमानस में कुछ स्थानों पर घटना एकदम से घटित हो जाती है ऐसे ही एक स्थान पर मैंने यह "reading between the lines" लिखा है
SHAILESH MOHAN
जो होता है आज ही होता है
जो होता है आज ही होता है
लक्ष्मी सिंह
सफलता तीन चीजे मांगती है :
सफलता तीन चीजे मांगती है :
GOVIND UIKEY
Loading...