Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
7 Feb 2024 · 1 min read

युद्ध के बाद

मंजर बिलकुल ही अलग दिखे युद्ध के बाद।
बस्ती है उजड़ी हुई,टूटा घर बर्बाद।।

कैसी लपटें उठ रहीं,विभीषिका की आग।
मिटे कभी मिटता नहीं,ऐसा गहरा दाग।।

जर्रा-जर्रा कांपता,बहुत भयावह हाल।
बारूदों के ढेर पर, बिखरे नर-कंकाल।।

धरती पर लाशें बिछी,चहुँ दिश चीख-पुकार।
कटे सरों का हर तरफ,दिखता है अंबार।।

दवाइयाँ आहार जल ,सबका पड़ा अकाल।
जख्मों से तड़पे मनुज,दर्दों से बेहाल।।

देखो कैसे युद्ध ने ,सब कुछ किया तबाह।
दसों-दिशा में गूँजता,कितना करुण कराह।।

माँ की सूनी कोख है,बच्चे हुए अनाथ।
पत्नी विधवा हो गई,छूटा पति का साथ।।

युद्ध हमेशा से किया,केवल नरसंहार।
जाते-जाते दे गया,मन पर जख्म हजार।।

नहीं मौत की हो फसल,खिले खेत-खलिहान।
भाई-भाई-सा रहें,भारत पाकिस्तान।।
-लक्ष्मी सिंह

Language: Hindi
1 Like · 76 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from लक्ष्मी सिंह
View all
You may also like:
हे कृतघ्न मानव!
हे कृतघ्न मानव!
Vishnu Prasad 'panchotiya'
अजर अमर सतनाम
अजर अमर सतनाम
Dr. Kishan tandon kranti
*जितनी जिसकी सोच संकुचित, वह उतना मेधावी है    (मुक्तक)*
*जितनी जिसकी सोच संकुचित, वह उतना मेधावी है (मुक्तक)*
Ravi Prakash
बहुमूल्य जीवन और युवा पीढ़ी
बहुमूल्य जीवन और युवा पीढ़ी
Gaurav Sony
हम दुसरों की चोरी नहीं करते,
हम दुसरों की चोरी नहीं करते,
Dr. Man Mohan Krishna
गर्द चेहरे से अपने हटा लीजिए
गर्द चेहरे से अपने हटा लीजिए
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
अनजान दीवार
अनजान दीवार
Mahender Singh
मैंने इन आंखों से गरीबी को रोते देखा है ।
मैंने इन आंखों से गरीबी को रोते देखा है ।
Phool gufran
आंखों में भरी यादें है
आंखों में भरी यादें है
Rekha khichi
अब मेरी मजबूरी देखो
अब मेरी मजबूरी देखो
VINOD CHAUHAN
2576.पूर्णिका
2576.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
जीवन और मृत्यु के मध्य, क्या उच्च ये सम्बन्ध है।
जीवन और मृत्यु के मध्य, क्या उच्च ये सम्बन्ध है।
Manisha Manjari
एतमाद नहीं करते
एतमाद नहीं करते
Dr fauzia Naseem shad
ये मतलबी दुनिया है साहब,
ये मतलबी दुनिया है साहब,
Umender kumar
दोहा त्रयी. . . . .
दोहा त्रयी. . . . .
sushil sarna
जल
जल
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
गुरु माया का कमाल
गुरु माया का कमाल
DR ARUN KUMAR SHASTRI
मुझे इश्क से नहीं,झूठ से नफरत है।
मुझे इश्क से नहीं,झूठ से नफरत है।
लक्ष्मी सिंह
जिनके मुताबिक मां को
जिनके मुताबिक मां को
*Author प्रणय प्रभात*
हे मृत्यु तैयार यदि तू आने को प्रसन्न मुख आ द्वार खुला है,
हे मृत्यु तैयार यदि तू आने को प्रसन्न मुख आ द्वार खुला है,
Vishal babu (vishu)
🥗फीका 💦 त्योहार 💥 (नाट्य रूपांतरण)
🥗फीका 💦 त्योहार 💥 (नाट्य रूपांतरण)
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
प्रीतम के दोहे
प्रीतम के दोहे
आर.एस. 'प्रीतम'
कोरा कागज और मेरे अहसास.....
कोरा कागज और मेरे अहसास.....
Santosh Soni
....????
....????
शेखर सिंह
*कुछ तो बात है* ( 23 of 25 )
*कुछ तो बात है* ( 23 of 25 )
Kshma Urmila
तुम कहो तो कुछ लिखूं!
तुम कहो तो कुछ लिखूं!
विकास सैनी The Poet
सांच कह्यां सुख होयस्यी,सांच समद को सीप।
सांच कह्यां सुख होयस्यी,सांच समद को सीप।
विमला महरिया मौज
" ये धरती है अपनी...
VEDANTA PATEL
नारी
नारी
Prakash Chandra
गांव के छोरे
गांव के छोरे
जय लगन कुमार हैप्पी
Loading...