Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 Jan 2023 · 1 min read

या’ रब तेरे जहान के

चुभते हुए इस दिल में
सवालात कितने हैं ।
या”रब तेरे जहान के
निगहबान कितने हैं ।।
सोचोगे ग़र कभी तो
सोचा न जायेगा ।
इंसानों की इस भीड़ में
इंसान कितने हैं ।।

डाॅ फौज़िया नसीम शाद

Language: Hindi
14 Likes · 217 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr fauzia Naseem shad
View all
You may also like:
पापा की बिटिया
पापा की बिटिया
Arti Bhadauria
Sometimes you shut up not
Sometimes you shut up not
Vandana maurya
पढ़ना जरूर
पढ़ना जरूर
पूर्वार्थ
नौकरी न मिलने पर अपने आप को अयोग्य वह समझते हैं जिनके अंदर ख
नौकरी न मिलने पर अपने आप को अयोग्य वह समझते हैं जिनके अंदर ख
Gouri tiwari
💐प्रेम कौतुक-473💐
💐प्रेम कौतुक-473💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
2974.*पूर्णिका*
2974.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
भारत का संविधान
भारत का संविधान
Shekhar Chandra Mitra
!! निरीह !!
!! निरीह !!
Chunnu Lal Gupta
जो लोग धन को ही जीवन का उद्देश्य समझ बैठे है उनके जीवन का भो
जो लोग धन को ही जीवन का उद्देश्य समझ बैठे है उनके जीवन का भो
Rj Anand Prajapati
दिया एक जलाए
दिया एक जलाए
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
दर्द अपना है
दर्द अपना है
Dr fauzia Naseem shad
कोरोना :शून्य की ध्वनि
कोरोना :शून्य की ध्वनि
Mahendra singh kiroula
सत्साहित्य कहा जाता है ज्ञानराशि का संचित कोष।
सत्साहित्य कहा जाता है ज्ञानराशि का संचित कोष।
महेश चन्द्र त्रिपाठी
हिन्दी दिवस
हिन्दी दिवस
SHAMA PARVEEN
शब्द
शब्द
Neeraj Agarwal
प्रेम पर्व आया सखी
प्रेम पर्व आया सखी
लक्ष्मी सिंह
खोने के लिए कुछ ख़ास नहीं
खोने के लिए कुछ ख़ास नहीं
The_dk_poetry
मुहब्बत सचमें ही थी।
मुहब्बत सचमें ही थी।
Taj Mohammad
कोशिश कम न थी मुझे गिराने की,
कोशिश कम न थी मुझे गिराने की,
Vindhya Prakash Mishra
जन्म से मृत्यु तक भारत वर्ष मे संस्कारों का मेला है
जन्म से मृत्यु तक भारत वर्ष मे संस्कारों का मेला है
Satyaveer vaishnav
रखा जाता तो खुद ही रख लेते...
रखा जाता तो खुद ही रख लेते...
कवि दीपक बवेजा
याद - दीपक नीलपदम्
याद - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
कहीं वैराग का नशा है, तो कहीं मन को मिलती सजा है,
कहीं वैराग का नशा है, तो कहीं मन को मिलती सजा है,
Manisha Manjari
उसे गवा दिया है
उसे गवा दिया है
Awneesh kumar
*खाती दीमक लकड़ियॉं, कागज का सामान (कुंडलिया)*
*खाती दीमक लकड़ियॉं, कागज का सामान (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
ग़ज़ल/नज़्म - उसके सारे जज़्बात मद्देनजर रखे
ग़ज़ल/नज़्म - उसके सारे जज़्बात मद्देनजर रखे
अनिल कुमार
सरकारी नौकरी
सरकारी नौकरी
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
*रिश्ता होने से रिश्ता नहीं बनता,*
*रिश्ता होने से रिश्ता नहीं बनता,*
शेखर सिंह
भक्ति -गजल
भक्ति -गजल
rekha mohan
माना तुम्हारे मुक़ाबिल नहीं मैं।
माना तुम्हारे मुक़ाबिल नहीं मैं।
डॉ.सीमा अग्रवाल
Loading...