Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
9 Jul 2016 · 1 min read

याद इक किस्सा पुराना आ गया

याद इक किस्सा पुराना आ गया।
सामने बीता ज़माना आ गया।

अब न कोई देख उनको पाएगा
आँसुओं को मनाना आ गया।

जीतने का था हुनर उसको पता
यूं उसे हमको सताना आ गया।

क्यों समझ पाया न दिल की बात यह
अब समय संग बस भुलाना आ गया।

ज़ख्म हैं गहरे बहुत ही यह अभी
हौंसलों से खुद सजाना आ गया।।।
कामनी गुप्ता ***

1 Like · 9 Comments · 533 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from kamni Gupta
View all
You may also like:
जी लगाकर ही सदा
जी लगाकर ही सदा
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
मानसिक विकलांगता
मानसिक विकलांगता
Dr fauzia Naseem shad
*कोई अपना पराया है (हिंदी गजल/गीतिका)*
*कोई अपना पराया है (हिंदी गजल/गीतिका)*
Ravi Prakash
ईंट खोदकर नींव की, गिरा दिया निज गेह ।
ईंट खोदकर नींव की, गिरा दिया निज गेह ।
Arvind trivedi
यदि  हम विवेक , धैर्य और साहस का साथ न छोडे़ं तो किसी भी विप
यदि हम विवेक , धैर्य और साहस का साथ न छोडे़ं तो किसी भी विप
Raju Gajbhiye
पहाड़ पर कविता
पहाड़ पर कविता
Brijpal Singh
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Neelam Sharma
श्रीराम गिलहरी संवाद अष्टपदी
श्रीराम गिलहरी संवाद अष्टपदी
SHAILESH MOHAN
दस्तक बनकर आ जाओ
दस्तक बनकर आ जाओ
Satish Srijan
अबीर ओ गुलाल में अब प्रेम की वो मस्ती नहीं मिलती,
अबीर ओ गुलाल में अब प्रेम की वो मस्ती नहीं मिलती,
Er. Sanjay Shrivastava
दूर किसी वादी में
दूर किसी वादी में
Shekhar Chandra Mitra
Friendship Day
Friendship Day
Tushar Jagawat
अगर दिल में प्रीत तो भगवान मिल जाए।
अगर दिल में प्रीत तो भगवान मिल जाए।
Priya princess panwar
💐प्रेम कौतुक-228💐
💐प्रेम कौतुक-228💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
है धरा पर पाप का हर अभिश्राप बाकी!
है धरा पर पाप का हर अभिश्राप बाकी!
Bodhisatva kastooriya
राष्ट्र-हितैषी के रूप में
राष्ट्र-हितैषी के रूप में
*Author प्रणय प्रभात*
हमे यार देशी पिला दो किसी दिन।
हमे यार देशी पिला दो किसी दिन।
विजय कुमार नामदेव
DR ARUN KUMAR SHASTRI
DR ARUN KUMAR SHASTRI
DR ARUN KUMAR SHASTRI
पंखों को मेरे उड़ान दे दो
पंखों को मेरे उड़ान दे दो
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
गहरी हो बुनियादी जिसकी
गहरी हो बुनियादी जिसकी
कवि दीपक बवेजा
रात के अंधेरों से सीखा हूं मैं ।
रात के अंधेरों से सीखा हूं मैं ।
★ IPS KAMAL THAKUR ★
।। सुविचार ।।
।। सुविचार ।।
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
शक्तिशालिनी
शक्तिशालिनी
Jeewan Singh 'जीवनसवारो'
अंधेरों में अस्त हो, उजाले वो मेरे नाम कर गया।
अंधेरों में अस्त हो, उजाले वो मेरे नाम कर गया।
Manisha Manjari
समय और स्त्री
समय और स्त्री
Madhavi Srivastava
खुला आसमान
खुला आसमान
Surinder blackpen
यह धरती भी तो
यह धरती भी तो
gurudeenverma198
किया है तुम्हें कितना याद ?
किया है तुम्हें कितना याद ?
The_dk_poetry
" तुम्हारे संग रहना है "
DrLakshman Jha Parimal
रंग बदलते बहरूपिये इंसान को शायद यह एहसास बिलकुल भी नहीं होत
रंग बदलते बहरूपिये इंसान को शायद यह एहसास बिलकुल भी नहीं होत
Seema Verma
Loading...