Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Jul 2023 · 1 min read

मौसम बेईमान है – प्रेम रस

रात नशे में है या ये समा ही जवान है
तुम हो मैं हूं और मौसम बेईमान है।

ढूंढ रहे है हम अपना दिल तेरे दिल के इर्द गिर्द,
कोई नहीं इशारा के ये दिल अब कहां है।
तुम हो मैं हूं और मौसम बेईमान है।

है सूरत कोई संगमरमर की मूरत
दरस कोई दिव्य ही यहां है
तुम हो मैं हूं और मौसम बेईमान है।

तरसे बरसते या बरसते तरसते
इस भवरें को पराग कण नसीब ही कहां है
तुम हो मैं हूं और मौसम बेईमान है।

संभलना इसे है बहकने लगा पर
इत्र सा कोई महकने लगा है
प्रेम के यज्ञ का हो सफल प्रयोजन
मगर मेरी उतनी प्रतीभा कहां है
तुम हो मैं हूं और मौसम बेईमान है।

सितारें भी तेरी तलब में है बैठे
दीदार को तेरी ये चांदनी यहां है
तुम हो तो रोशन है गुलिस्ता हमारा
तेरे बगैर कोई खुशियां कहां है
तुम हो मैं हूं और मौसम बेईमान है।

बेईमान मौसम से बेईमानी मेरी
रोके से भी प्रेम रुकता कहां है
है प्रीत का सागर भी ये दिल तुम्हारा
सागर से मोती चुरालूं जो कह दो
रोके से ‘अमित’ रुका ही कहां है
– अमित पाठक शाकद्वीपी

Language: Hindi
212 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
Kohre ki bunde chhat chuki hai,
Kohre ki bunde chhat chuki hai,
Sakshi Tripathi
💐प्रेम कौतुक-480💐
💐प्रेम कौतुक-480💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
हे पिता ! जबसे तुम चले गए ...( पिता दिवस पर विशेष)
हे पिता ! जबसे तुम चले गए ...( पिता दिवस पर विशेष)
ओनिका सेतिया 'अनु '
घड़ी
घड़ी
SHAMA PARVEEN
सेल्फी या सेल्फिश
सेल्फी या सेल्फिश
Dr. Pradeep Kumar Sharma
Ranjeet Kumar Shukla
Ranjeet Kumar Shukla
Ranjeet Kumar Shukla
कविता
कविता
Rambali Mishra
* भावना स्नेह की *
* भावना स्नेह की *
surenderpal vaidya
किस बात का गुरुर हैं,जनाब
किस बात का गुरुर हैं,जनाब
शेखर सिंह
साइबर ठगी हाय रे, करते रहते लोग
साइबर ठगी हाय रे, करते रहते लोग
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
विश्व गुरु भारत का तिरंगा, विश्व पटल लहराएगा।
विश्व गुरु भारत का तिरंगा, विश्व पटल लहराएगा।
Neelam Sharma
उनसे कहना ज़रा दरवाजे को बंद रखा करें ।
उनसे कहना ज़रा दरवाजे को बंद रखा करें ।
Phool gufran
किन्तु क्या संयोग ऐसा; आज तक मन मिल न पाया?
किन्तु क्या संयोग ऐसा; आज तक मन मिल न पाया?
संजीव शुक्ल 'सचिन'
कान्हा भजन
कान्हा भजन
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
वो मुझे
वो मुझे "चिराग़" की ख़ैरात" दे रहा है
Dr Tabassum Jahan
ऐसी थी बेख़्याली
ऐसी थी बेख़्याली
Dr fauzia Naseem shad
सन्यासी
सन्यासी
Neeraj Agarwal
अटल बिहारी मालवीय जी (रवि प्रकाश की तीन कुंडलियाँ)
अटल बिहारी मालवीय जी (रवि प्रकाश की तीन कुंडलियाँ)
Ravi Prakash
जग-मग करते चाँद सितारे ।
जग-मग करते चाँद सितारे ।
Vedha Singh
ये न सोच के मुझे बस जरा -जरा पता है
ये न सोच के मुझे बस जरा -जरा पता है
सिद्धार्थ गोरखपुरी
बसंत आने पर क्या
बसंत आने पर क्या
Surinder blackpen
#डॉ अरुण कुमार शास्त्री
#डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
सत्य प्रेम से पाएंगे
सत्य प्रेम से पाएंगे
महेश चन्द्र त्रिपाठी
जागता हूँ क्यों ऐसे मैं रातभर
जागता हूँ क्यों ऐसे मैं रातभर
gurudeenverma198
दीदार
दीदार
Vandna thakur
ग़ज़ल/नज़्म - दिल में ये हलचलें और है शोर कैसा
ग़ज़ल/नज़्म - दिल में ये हलचलें और है शोर कैसा
अनिल कुमार
ना फूल मेरी क़ब्र पे
ना फूल मेरी क़ब्र पे
Shweta Soni
छवि अति सुंदर
छवि अति सुंदर
Buddha Prakash
विषधर
विषधर
आनन्द मिश्र
🙅आज का लतीफ़ा🙅
🙅आज का लतीफ़ा🙅
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...