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28 Jan 2024 · 1 min read

मौन

तुम्हारे मौन को पाकर,
हृदय भयभीत होता है।
भला ऐसा कहीं जग में,
कोई मनमीत होता है।
जहां पर प्रीत बसती है,
बेरूखी भी वहीं होती।
कभी दिल हारता है तो,
कहीं पर जीत होता है।।
तुम्हारे मौन को पाकर,
हृदय भयभीत होता है।।

✍️✍️✍️✍️✍️✍️
रचना- मौलिक एवं स्वरचित
निकेश कुमार ठाकुर
गृह जिला- सुपौल (बिहार)
संप्रति- कटिहार (बिहार)
सं०-9534148597

Language: Hindi
2 Likes · 1 Comment · 187 Views
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