Sep 10, 2016 · 1 min read

मौत खुलकर कह गयी…

चल बसा निर्दोष घायल चीख कातर सह गयी.
खून सड़कों पर बहा जब मौत खुलकर कह गयी.
मज़हबी उन्माद घातक लोग डर-डर जी रहे,
एकता आतंक का पर्याय बनकर रह गयी..

–इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

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