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15 May 2023 · 1 min read

मैं

साहित्य की गलियों में आती
कलम थाम कर शाम निज नामकर
भावों का सागर उमड़ पड़ता
बिना विश्राम कर
शब्दों की सरिता बह आती
जाम भर कर
फिर एक नूतन सृजन को पाती
अपने नाम कर,
उन्हें सुर ताल से सजाती
लबों पर ला कर
खूबसूरत पहचान बनाती
रचना सुना-पढा़ कर
प्रसन्नता से झूम जाती में
निज कर।

-सीमा गुप्ता

Language: Hindi
6 Likes · 3 Comments · 268 Views
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