Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Nov 2022 · 1 min read

मैं समझता हूँ तुमको अपना

तुम ही मेरा प्रेम हो,
और कोशिश कई बार की,
यह बताने को तुमको,
मगर मना कर दिया दिल ने,
और अब तलाश रहा हूँ अवसर,
कि कह सके तू ही यह,
पहल करके ऐसी,
कि अब शेष ही क्या है,
जिसको बताने में हो शर्म,
क्योंकि मालूम है सबको,
मैं समझता हूँ तुमको अपना।

सच में मानता हूँ तुमको मैं,
अपना ख्वाब और चमन,
अपनी खुशी और इज्जत,
इसीलिए सह रहा हूँ मैं,
दुनिया के ताने और सितम,
रोता हूँ तन्हाई में याद करके तुमको,
जिस प्रकार तुम रोते हो तन्हाई में,
मगर कर देना चाहता हूँ खत्म,
सारी बंदिशें- शक और दूरियां,
मैं समझता हूँ तुमको अपना।

कभी होती है नफरत भी तुमसे,
देखकर तुम्हारी हरकतें बेहूदा,
तुम्हारी नीतियां मेरे खिलाफ,
तुम्हारे कठोर शब्द सुनकर,
मुझसे दूरी बनाकर रहने पर,
मगर मैं तोड़ नहीं पाता हूँ,
तुमसे अपना रिश्ता और प्यार,
और नहीं मिला पाता हूँ मैं,
अपना हाथ किसी और से,
मैं समझता हूँ तुमको अपना।

शिक्षक एवं साहित्यकार-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

Language: Hindi
204 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
पाप का जब भरता है घड़ा
पाप का जब भरता है घड़ा
Paras Nath Jha
*नई दुकान कहॉं चलती है (हिंदी गजल)*
*नई दुकान कहॉं चलती है (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
“I will keep you ‘because I prayed for you.”
“I will keep you ‘because I prayed for you.”
पूर्वार्थ
कहां से कहां आ गए हम..!
कहां से कहां आ गए हम..!
Srishty Bansal
मेहनती मोहन
मेहनती मोहन
Dr. Pradeep Kumar Sharma
World Tobacco Prohibition Day
World Tobacco Prohibition Day
Tushar Jagawat
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
बथुवे जैसी लड़कियाँ /  ऋतु राज (पूरी कविता...)
बथुवे जैसी लड़कियाँ / ऋतु राज (पूरी कविता...)
Rituraj shivem verma
जब कभी प्यार  की वकालत होगी
जब कभी प्यार की वकालत होगी
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
मेरा गांव
मेरा गांव
अनिल "आदर्श"
कहीं भूल मुझसे न हो जो गई है।
कहीं भूल मुझसे न हो जो गई है।
surenderpal vaidya
अवसर
अवसर
संजय कुमार संजू
"अकेलापन और यादें "
Pushpraj Anant
असुर सम्राट भक्त प्रह्लाद – भातृ वध – 05
असुर सम्राट भक्त प्रह्लाद – भातृ वध – 05
Kirti Aphale
"कुछ लोग हैं"
Dr. Kishan tandon kranti
पाठ कविता रुबाई kaweeshwar
पाठ कविता रुबाई kaweeshwar
jayanth kaweeshwar
2764. *पूर्णिका*
2764. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
देश के अगले क़ानून मंत्री उज्ज्वल निकम...?
देश के अगले क़ानून मंत्री उज्ज्वल निकम...?
*प्रणय प्रभात*
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
हुआ है इश्क जब से मैं दिवानी हो गई हूँ
हुआ है इश्क जब से मैं दिवानी हो गई हूँ
Dr Archana Gupta
मुक्तक ....
मुक्तक ....
Neelofar Khan
साहिल पर खड़े खड़े हमने शाम कर दी।
साहिल पर खड़े खड़े हमने शाम कर दी।
Sahil Ahmad
Yu hi wakt ko hatheli pat utha kar
Yu hi wakt ko hatheli pat utha kar
Sakshi Tripathi
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
बाल कविता : बादल
बाल कविता : बादल
Rajesh Kumar Arjun
मैं सोचता हूँ आखिर कौन हूॅ॑ मैं
मैं सोचता हूँ आखिर कौन हूॅ॑ मैं
VINOD CHAUHAN
*जंगल की आग*
*जंगल की आग*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
घमंड
घमंड
Ranjeet kumar patre
बाल दिवस विशेष- बाल कविता - डी के निवातिया
बाल दिवस विशेष- बाल कविता - डी के निवातिया
डी. के. निवातिया
Loading...