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13 Apr 2024 · 1 min read

मेरी कलम से…

मेरी कलम से…
आनन्द कुमार
कलम की स्याही और विश्वास में बहुत अंतर नहीं होता है, दोनों ख़त्म होता है तो, एक लिखना छोड़ देता तो दूसरा ढूँढना!

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