Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 Oct 2022 · 1 min read

मेरी आंखों में

मुस्कुराहट लबों की क्या कहिए ।
मेरी आंखों में ख़्वाब तेरे है ।।

डाॅ फौज़िया नसीम शाद

Language: Hindi
Tag: शेर
18 Likes · 257 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr fauzia Naseem shad
View all
You may also like:
#दीनता_की_कहानी_कहूँ_और_क्या....!!
#दीनता_की_कहानी_कहूँ_और_क्या....!!
संजीव शुक्ल 'सचिन'
मेरे राम तेरे राम
मेरे राम तेरे राम
DR ARUN KUMAR SHASTRI
💐अज्ञात के प्रति-37💐
💐अज्ञात के प्रति-37💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
मुहब्बत का घुट
मुहब्बत का घुट
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
2542.पूर्णिका
2542.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
हीरा बा
हीरा बा
मृत्युंजय कुमार
*तुम और  मै धूप - छाँव  जैसे*
*तुम और मै धूप - छाँव जैसे*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
चिंटू चला बाज़ार | बाल कविता
चिंटू चला बाज़ार | बाल कविता
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
ग़ज़ल सगीर
ग़ज़ल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
नारी
नारी
Bodhisatva kastooriya
वक्त से लड़कर अपनी तकदीर संवार रहा हूँ।
वक्त से लड़कर अपनी तकदीर संवार रहा हूँ।
सिद्धार्थ गोरखपुरी
मैं हूँ ना
मैं हूँ ना
gurudeenverma198
कोरी आँखों के ज़र्द एहसास, आकर्षण की धुरी बन जाते हैं।
कोरी आँखों के ज़र्द एहसास, आकर्षण की धुरी बन जाते हैं।
Manisha Manjari
साजन आने वाले हैं
साजन आने वाले हैं
Satish Srijan
सम्मान तुम्हारा बढ़ जाता श्री राम चरण में झुक जाते।
सम्मान तुम्हारा बढ़ जाता श्री राम चरण में झुक जाते।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
#पंचैती
#पंचैती
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
फितरत
फितरत
Kanchan Khanna
जो ये खेल
जो ये खेल
मानक लाल मनु
समूह
समूह
Neeraj Agarwal
काश तुम ये जान पाते...
काश तुम ये जान पाते...
डॉ.सीमा अग्रवाल
*मायापति को नचा रही, सोने के मृग की माया (गीत)*
*मायापति को नचा रही, सोने के मृग की माया (गीत)*
Ravi Prakash
देश आज 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा,
देश आज 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा,
पूर्वार्थ
~~🪆 *कोहबर* 🪆~~
~~🪆 *कोहबर* 🪆~~
सुरेश अजगल्ले"इंद्र"
घर-घर तिरंगा
घर-घर तिरंगा
Jeewan Singh 'जीवनसवारो'
"रंग भरी शाम"
Dr. Kishan tandon kranti
दूर जाकर क्यों बना लीं दूरियां।
दूर जाकर क्यों बना लीं दूरियां।
सत्य कुमार प्रेमी
#संस्मरण
#संस्मरण
*Author प्रणय प्रभात*
बावला
बावला
Ajay Mishra
मुक्तक
मुक्तक
महेश चन्द्र त्रिपाठी
शिल्पकार
शिल्पकार
Surinder blackpen
Loading...