Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
31 Jul 2023 · 2 min read

करनी का फल

बालकहानी
करनी का फल

अजय और सुमीत एक ही कक्षा के दो छात्र थे। सुमीत एक निर्धन परिवार का सीधा-सादा लड़का था जबकि अजय एक शहर के बड़े उद्योगपति का इकलौता बेटा था। माँ-बाप के अधिक लाड़़-प्यार ने उसे बेहद घमण्डी तथा जिद्दी बना दिया था। सुमीत पढ़ाई-लिखाई में हमेशा पीछे और कक्षा में होने वाली शरारतों में सबसे आगे रहता था।
सुमीत इन सबमें कभी भाग नहीं लेता था। वह कभी-कभी परेशान होकर इन शैतानियों की सूचना अपने मास्टर जी को दे दिया करता था, जिससे अजय को दण्ड भुगतना पड़ता। इसलिए अजय सुमीत को अपना दुश्मन समझ बैठा और उससे ईष्या करने लगा। वह हर वक्त सुमीत को सताता और उसको नीचा दिखाने की कोशिश करता। वह मन ही मन सुमीत से बदला लेने और उसे सबक सिखाने के लिए अवसर की प्रतीक्षा में लगा रहता था।
आखिर उसे मौका मिल ही गया। वह दीपावली की जगमगाती रात थी। घर-घर में रोशनियों की चमक-दमक ने चारों ओर उजाला कर रखा था। सब तरफ से आतिशबाजियों व पटाखों की धमाकों से आकाश गूँज रहा था।
अजय ने सोचा यही मौका है सुमीत को सबक सिखाने का। उसके शैतान दिमाग ने एक खतरनाक योजना बनायी। थोड़ी देर बाद सुमीत जब उसके घर के सामने से गुजरेगा तो वह अपना काम निपटा लेगा। जो भी नुकसान होगा उसे महज एक दुर्घटना ही समझा जाएगा और उस पर कोई इलजाम नहीं आएगा।
ज्यों ही सुमीत वहाँ से गुजरा, अजय ने उस पर कुछ बम फटाखे फेंके। बम-फटाखों की धमाकों के साथ-साथ दर्दनाक चीखों से वातावरण गूँज उठा।
अजय की चीखें सुनकर सुमीत तेजी से अजय की और दौड़ा। उसने शोर मचाकर आसपास के लोगों को इकट्ठा किया।
अजय लगभग बेहोशी की हालत में था। उसके हाथ-पाँव और चेहरे के काफी मांस जल गए थे। उसे तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया। अजय के माता-पिता अपने पुत्र की ऐसी दुर्दशा देखकर रो पड़े।
अजय को सात दिनों तक अस्पताल में ही रहना पड़ा। बेहोशी की हालत में वह बड़बड़ाता- ‘‘सुमीत, मुझे माफ कर दो।’’ ‘‘सुमीत मुझे माफ कर दो।’’
सुमीत को बड़ा आश्चर्य होता कि अजय उससे क्यों माफी माँग रहा है ? होश में आने पर अजय के पिताजी ने अपने बेटे से पूछा- ‘‘अजय बेटे, जरा बताना तो तुम्हारी यह दुर्दशा कैसे हुई ?’’
अजय ने बताया कि वह किस प्रकार से सुमीत पर बम फेंकने वाला था और बम उसी के हाथ में फट गया। अजय ने सुमीत तथा अपने माता-पिता सभी से माफी माँगी और वादा किया कि अब कभी किसी के लिए न तो बुरा सोचेगा नहीं करेगा।
पिताजी ने समझाया- ‘‘बेटा, हमेशा याद रखना चाहिए जो दूसरों के लिए गड्डा खोदता है वह खुद भी उसमें गिर सकता है। इसलिए हमें कभी किसी के लिए बुरा नहीं सोचना चाहिए न ही करना चाहिए।”
– डाॅ. प्रदीप कुमार शर्मा
रायपुर, छत्तीसगढ़

Language: Hindi
312 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*शरीर : आठ दोहे*
*शरीर : आठ दोहे*
Ravi Prakash
जीवन मर्म
जीवन मर्म
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
हकीकत  पर  तो  इख्तियार  है
हकीकत पर तो इख्तियार है
shabina. Naaz
सापटी
सापटी
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
हो जाऊं तेरी!
हो जाऊं तेरी!
Farzana Ismail
सफर में महोब्बत
सफर में महोब्बत
Anil chobisa
इस मुकाम पे तुझे क्यूं सूझी बिछड़ने की
इस मुकाम पे तुझे क्यूं सूझी बिछड़ने की
शिव प्रताप लोधी
Two Different Genders, Two Different Bodies And A Single Soul
Two Different Genders, Two Different Bodies And A Single Soul
Manisha Manjari
खामोश कर्म
खामोश कर्म
Sandeep Pande
बेटी
बेटी
Dr. Pradeep Kumar Sharma
. *प्रगीत*
. *प्रगीत*
Dr.Khedu Bharti
श्रमिक  दिवस
श्रमिक दिवस
Satish Srijan
I lose myself in your love,
I lose myself in your love,
Shweta Chanda
ख़्याल
ख़्याल
Dr. Seema Varma
सीख
सीख
Sanjay ' शून्य'
झूठे से प्रेम नहीं,
झूठे से प्रेम नहीं,
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
* नव जागरण *
* नव जागरण *
surenderpal vaidya
I guess afterall, we don't search for people who are exactly
I guess afterall, we don't search for people who are exactly
पूर्वार्थ
सिर्फ विकट परिस्थितियों का सामना
सिर्फ विकट परिस्थितियों का सामना
Anil Mishra Prahari
अनुभव 💐🙏🙏
अनुभव 💐🙏🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
जिन्दगी की शाम
जिन्दगी की शाम
Bodhisatva kastooriya
दिव्य काशी
दिव्य काशी
Pooja Singh
■ जारी रही दो जून की रोटी की जंग
■ जारी रही दो जून की रोटी की जंग
*Author प्रणय प्रभात*
ज़िंदगी एक कहानी बनकर रह जाती है
ज़िंदगी एक कहानी बनकर रह जाती है
Bhupendra Rawat
मोर
मोर
Manu Vashistha
हम
हम
Dr. Kishan tandon kranti
तेरी इस बेवफाई का कोई अंजाम तो होगा ।
तेरी इस बेवफाई का कोई अंजाम तो होगा ।
Phool gufran
लहरों ने टूटी कश्ती को कमतर समझ लिया
लहरों ने टूटी कश्ती को कमतर समझ लिया
अंसार एटवी
दुखों का भार
दुखों का भार
Pt. Brajesh Kumar Nayak
बेजुबाँ सा है इश्क़ मेरा,
बेजुबाँ सा है इश्क़ मेरा,
शेखर सिंह
Loading...