Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
3 Jul 2016 · 1 min read

मृ्ग अभिलाशा —हम विकास की ओर !–कविता [सुबह से पहले काव्य संग्र्ह से

( कविता )

मृ्ग अभिलाशा
हम विकास की ओर !
किस मापदंड मे?
वास्तविक्ता या पाखन्ड मे !
तृ्ष्णाओं के सम्मोहन मे
या प्रकृ्ति के दोहन मे
साईँस के अविश्कारों मे
या उससे फलिभूत विकरों मे
मानवता के संस्कारो मे
या सामाजिक विकरों मे
धर्म के मर्म या उत्थान मे
या बढ्ते साम्प्रदायिक उफान मे
पूँजीपती के पोषण मे
या गरीब के शोषण मे
क्या रोटी कपडा और मकान मे
या फुटपाथ पर पडे इन्सान मे
क्या बडी बडी अट्टालिकाओं मे
या झोंपड पट्टी कि बढती सँख्याओं मे
क्या नारीत्व के उत्थान मे
या नारी के घटते परिधान मे
क्या ऊँची उडान की परिभाषा मे
या झूठी मृ्ग अभिलाषा मे
ऎ मानव कर अवलोकन
कर तर्क और वितर्क
फिर देखना फर्क
ये है पाँच तत्वोँ का परिहास
प्राकृ्तिक सम्पदाओँ का ह्रास
ठहर 1 अपनी लालसाओँ को ना बढा
सृ्ष्टि को महाप्रलय की ओर ना लेजा

Language: Hindi
Tag: कविता
2 Comments · 379 Views
You may also like:
मौलिक विचार
डॉ.एल. सी. जैदिया 'जैदि'
बाबूजी
Kavita Chouhan
अना दिलों में सभी के....
अश्क चिरैयाकोटी
बदनाम दिल बेचारा है
Taj Mohammad
हौसला खुद को
Dr fauzia Naseem shad
तिरंगा
आकाश महेशपुरी
'जिंदगी'
Godambari Negi
अतीतजीवी (हास्य व्यंग्य)
Ravi Prakash
गुजरे लम्हे सुनो बहुत सुहाने थे
VINOD KUMAR CHAUHAN
✍️One liner quotes✍️
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
खुशियों भरे पल
surenderpal vaidya
" सच का दिया "
DESH RAJ
"लेखनी "
DrLakshman Jha Parimal
प्यार
विशाल शुक्ल
इस तरहां ऐसा स्वप्न देखकर
gurudeenverma198
! ! बेटी की विदाई ! !
Surya Barman
बारिश
मनोज कर्ण
कुछ झूठ की दुकान लगाए बैठे है
Ram Krishan Rastogi
जंग
shabina. Naaz
ऐसे थे मेरे पिता
Minal Aggarwal
कुछ न कुछ छूटना तो लाज़मी है।
Rakesh Bahanwal
✍️नामुक्कमल सफर✍️
'अशांत' शेखर
"कारगिल विजय दिवस"
Lohit Tamta
✳️🌀मेरा इश्क़ ग़मगीन नहीं है🌀✳️
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
बॉर्डर पर किसान
Shriyansh Gupta
मंगलमय हो भाई दूज, बहिन बेटियां सुखी रहें
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
भारतीय युवा
AMRESH KUMAR VERMA
कन्यादान क्यों और किसलिए [भाग६]
Anamika Singh
औनी पौनी बातें
DR ARUN KUMAR SHASTRI
प्यासा का शायर
Shekhar Chandra Mitra
Loading...