Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings
Nov 9, 2016 · 1 min read

[[ मुहब्बत में सनम बातेँ फ़क़त दो चार हो जाये ]]

#मुक्तक

मुहब्बत में सनम बातेँ फ़क़त दो चार हो जाये
निहारु तुझ को जी भर अगर अधिकार हो जाये

कमल से होंठ नाज़ुक है कली हो तुम बहारों की
अग़र जो देख ले कोई वही दिलदार हो जाये

#नितिन_शर्मा

274 Views
You may also like:
इस तरह
Dr fauzia Naseem shad
पिता का साया हूँ
N.ksahu0007@writer
ये शिक्षामित्र है भाई कि इसमें जान थोड़ी है
आकाश महेशपुरी
.✍️वो थे इसीलिये हम है...✍️
'अशांत' शेखर
कुछ पल का है तमाशा
Dr fauzia Naseem shad
कुछ नहीं इंसान को
Dr fauzia Naseem shad
रावण - विभीषण संवाद (मेरी कल्पना)
Anamika Singh
बेटियां
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
✍️सूरज मुट्ठी में जखड़कर देखो✍️
'अशांत' शेखर
आतुरता
अंजनीत निज्जर
गर्मी का कहर
Ram Krishan Rastogi
कभी ज़मीन कभी आसमान.....
अश्क चिरैयाकोटी
कर्म का मर्म
Pooja Singh
"खुद की तलाश"
Ajit Kumar "Karn"
मर्यादा का चीर / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
पिता - जीवन का आधार
आनन्द कुमार
आदमी कितना नादान है
Ram Krishan Rastogi
सोच तेरी हो
Dr fauzia Naseem shad
मन
शेख़ जाफ़र खान
बदल जायेगा
शेख़ जाफ़र खान
*पापा … मेरे पापा …*
Neelam Chaudhary
ऐ ज़िन्दगी तुझे
Dr fauzia Naseem shad
श्रीमती का उलाहना
श्री रमण 'श्रीपद्'
ऐसे थे पापा मेरे !
Kuldeep mishra (KD)
मेरे पिता
rubichetanshukla रुबी चेतन शुक्ला
पिता
Deepali Kalra
बहुआयामी वात्सल्य दोहे
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
मेरे पापा
Anamika Singh
एसजेवीएन - बढ़ते कदम
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
✍️प्यारी बिटिया ✍️
Vaishnavi Gupta
Loading...