Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Jun 2016 · 1 min read

मुस्कुराता हूँ तो गम बढ़ता नहीं

मुस्कुराता हूँ तो गम बढता नही
डर से आंसू ही मेरा निकला नहीं

प्यार में रुसवा हो तो औरत ही क्यों
मर्द पे इल्जाम क्यों लगता नहीं

लूटने रहबर लगे गर काफिला
रास्ता कोई भी फिर बचता नहीं

कह दिया सो कर दिया पक्की जुबाँ
वायदे से पीछे वो हटता नहीं

बरगदों की छाँव मिलती गाँव में
पर वहां अब मैं कभी ठहरा नहीं

पत्थरों की ठोकरों से डर गया
आइना बाहर कभी निकला नहीं

माफ़ करना उसको मुश्किल तो न था
गर जुबाँ से जलजला उठता नहीं

अब यहाँ धोखा ही धोखा निर्मला
सच तुम्हारा काम अब आता नही

1 Comment · 206 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
Behaviour of your relatives..
Behaviour of your relatives..
Suryash Gupta
भोले नाथ तेरी सदा ही जय
भोले नाथ तेरी सदा ही जय
नेताम आर सी
लालच का फल
लालच का फल
Dr. Pradeep Kumar Sharma
आपका अनुरोध स्वागत है। यहां एक कविता है जो आपके देश की हवा क
आपका अनुरोध स्वागत है। यहां एक कविता है जो आपके देश की हवा क
कार्तिक नितिन शर्मा
💐अज्ञात के प्रति-116💐
💐अज्ञात के प्रति-116💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
प्रेम का पुजारी हूं, प्रेम गीत ही गाता हूं
प्रेम का पुजारी हूं, प्रेम गीत ही गाता हूं
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
*दुनिया में हों सभी निरोगी, हे प्रभु ऐसा वर दो (गीत)*
*दुनिया में हों सभी निरोगी, हे प्रभु ऐसा वर दो (गीत)*
Ravi Prakash
वोट की खातिर पखारें कदम
वोट की खातिर पखारें कदम
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
An Evening
An Evening
goutam shaw
■ दोहा / पर्व का संदेश
■ दोहा / पर्व का संदेश
*Author प्रणय प्रभात*
बैठा हूँ उस राह पर जो मेरी मंजिल नहीं
बैठा हूँ उस राह पर जो मेरी मंजिल नहीं
Pushpraj Anant
हमारे प्यार का आलम,
हमारे प्यार का आलम,
Satish Srijan
अश्क तन्हाई उदासी रह गई - संदीप ठाकुर
अश्क तन्हाई उदासी रह गई - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
है श्रेष्ट रक्तदान
है श्रेष्ट रक्तदान
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
* खुशियां मनाएं *
* खुशियां मनाएं *
surenderpal vaidya
!! यह तो सर गद्दारी है !!
!! यह तो सर गद्दारी है !!
Chunnu Lal Gupta
हमसे तुम वजनदार हो तो क्या हुआ,
हमसे तुम वजनदार हो तो क्या हुआ,
Umender kumar
बिल्कुल नहीं हूँ मैं
बिल्कुल नहीं हूँ मैं
Aadarsh Dubey
चलो माना तुम्हें कष्ट है, वो मस्त है ।
चलो माना तुम्हें कष्ट है, वो मस्त है ।
Dr. Man Mohan Krishna
2989.*पूर्णिका*
2989.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
जहां से चले थे वहीं आ गए !
जहां से चले थे वहीं आ गए !
Kuldeep mishra (KD)
“ फेसबुक के दिग्गज ”
“ फेसबुक के दिग्गज ”
DrLakshman Jha Parimal
अकेला रिश्ता
अकेला रिश्ता
विजय कुमार अग्रवाल
*बहुत कठिन डगर जीवन की*
*बहुत कठिन डगर जीवन की*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
स्मृतियाँ
स्मृतियाँ
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
आपके द्वारा हुई पिछली गलतियों को वर्तमान में ना दोहराना ही,
आपके द्वारा हुई पिछली गलतियों को वर्तमान में ना दोहराना ही,
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
धीरे धीरे
धीरे धीरे
रवि शंकर साह
आजकल का प्राणी कितना विचित्र है,
आजकल का प्राणी कितना विचित्र है,
Divya kumari
दोहा
दोहा
दुष्यन्त 'बाबा'
हर कोई जिन्दगी में अब्बल होने की होड़ में भाग रहा है
हर कोई जिन्दगी में अब्बल होने की होड़ में भाग रहा है
कवि दीपक बवेजा
Loading...